मेडिकल ऑक्सीजन की गंभीर कमी, क्या दुनिया फिर से महामारी जैसे संकट का सामना करेगी?
साल 2020 में जब कोविड-19 महामारी ने पूरी दुनिया को घेर लिया था, तो भारत समेत कई देशों में ऑक्सीजन सिलेंडर की भारी कमी हो गई थी। ऑक्सीजन की इस कमी के कारण लाखों लोगों की जानें गईं, और लोग इस बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करते हुए दिखाई दिए। अब एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जो यह दर्शाती है कि दुनिया की दो-तिहाई आबादी को मेडिकल ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं है। यह रिपोर्ट दुनिया के लिए एक चेतावनी है, खासकर उन देशों के लिए जो मेडिकल ऑक्सीजन की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं।
मेडिकल ऑक्सीजन की स्थिति पर चौंकाने वाली रिपोर्ट
लैंसेट कमीशन की रिपोर्ट में बताया गया है कि पाँच अरब लोग दुनिया में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी का सामना कर रहे हैं, और सबसे बड़ी समस्या उन लो और मिडिल क्लास देशों में है, जहां इनकी उपलब्धता बेहद कम है। इस रिपोर्ट के अनुसार, मेडिकल ऑक्सीजन का उपयोग न केवल सर्जरी, बल्कि अस्थमा जैसी बीमारियों और बच्चों के इलाज में भी किया जाता है। यही कारण है कि कोविड-19 महामारी के दौरान जो संकट पैदा हुआ था, उसे दोबारा न दोहराया जाए, इसके लिए मेडिकल ऑक्सीजन एक अहम भूमिका निभा सकती है।
मेडिकल ऑक्सीजन क्या है?
मेडिकल ऑक्सीजन, जैसा कि नाम से स्पष्ट है, स्वास्थ्य देखभाल में इस्तेमाल होने वाली शुद्ध ऑक्सीजन है। इसमें किसी प्रकार की अशुद्धि नहीं होती है और यह मरीजों के इलाज में, सर्जरी, और अस्थमा के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मेडिकल ऑक्सीजन का सही और पर्याप्त रूप से वितरण, स्वास्थ्य संकट के दौरान जीवन रक्षक साबित हो सकता है।
किस देश में सबसे अधिक ऑक्सीजन की कमी?
लैंसेट ग्लोबल हेल्थ कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहली बार है जब एक स्टडी में यह बताया गया है कि मेडिकल ऑक्सीजन का वितरण दुनिया में किस प्रकार भेदभावपूर्ण तरीके से किया गया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जिन 82 प्रतिशत लोगों को मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होती है, वे ज्यादातर लो और मिडिल क्लास इनकम देशों में रहते हैं। इनमें से लगभग 70 प्रतिशत लोग दक्षिण और पूर्वी एशिया, प्रशांत क्षेत्र और सब-सहारा अफ्रीका में रहते हैं, और इन लोगों को मुख्यत: Chronic Obstructive Pulmonary Disease (COPD) जैसी गंभीर बीमारियों के कारण मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जब तीन लोगों को मेडिकल ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, तो उनमें से एक से भी कम लोग इसे प्राप्त कर पाते हैं। इसके कारण लगभग 70 प्रतिशत मरीज बिना मेडिकल ऑक्सीजन के रह जाते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सब-सहारन अफ्रीका में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी सबसे ज्यादा है, जहां 91 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके साथ ही, दक्षिण एशिया में भी यह संकट लगातार बढ़ रहा है, जहां भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, और अफगानिस्तान जैसे देश शामिल हैं। दक्षिण एशिया में 78 प्रतिशत मेडिकल ऑक्सीजन की कमी है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
रिपोर्ट में दिए गए सुझाव
लैंसेट रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि कैसे सरकारें, इंडस्ट्री, ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां, शैक्षणिक संस्थान, और सिविल सोसाइटी मिलकर इस समस्या का समाधान कर सकते हैं और मेडिकल ऑक्सीजन को लोगों तक पहुंचा सकते हैं। रिसर्चर्स ने यह भी कहा कि मेडिकल ऑक्सीजन का सही तरीके से वितरण ग्लोबल पब्लिक हेल्थ को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है, और इसे सभी देशों में समान रूप से उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि भविष्य में किसी और महामारी या स्वास्थ्य संकट के समय लोगों को फिर से इस गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।
निष्कर्ष:
यह रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि मेडिकल ऑक्सीजन की कमी, विशेष रूप से लो और मिडिल क्लास देशों में, एक वैश्विक संकट बन सकता है। यदि इस समस्या को समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो आने वाले समय में दुनिया को एक और महामारी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति से बचने के लिए, सभी देशों को मिलकर इस संकट का समाधान निकालना होगा और मेडिकल ऑक्सीजन की उपलब्धता को बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
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