April 17, 2026

आरएसएस नेता दत्तात्रेय होसबाले की प्रयागराज महाकुंभ यात्रा: एक नई दिशा का आह्वान, धर्म और संस्कृति की रक्षा की आवश्यकता पर जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 9-10 फरवरी को प्रयागराज महाकुंभ के दो दिवसीय दौरे के दौरान इस ऐतिहासिक आयोजन के आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। महाकुंभ के दौरान उन्होंने इसे केवल एक मेला नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति का प्रतीक और संकल्प का महापर्व करार दिया। उनके इस दौरे ने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार की आवश्यकता को उजागर किया और नई पीढ़ी को सनातन धर्म से जोड़ने के लिए एक दिशा दिखाई।

महाकुंभ: केवल मेला नहीं, संकल्प का महापर्व

दत्तात्रेय होसबाले ने महाकुंभ की महत्ता को इस तरह से बताया, “महाकुंभ केवल मनुष्यों की भीड़ नहीं, बल्कि यह श्रद्धालुओं का अद्वितीय संगम है, जहां लाखों लोग अपने जीवन को धर्म, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से एक नई दिशा देते हैं।” उन्होंने इस आयोजन को सनातन संस्कृति का प्रतीक बताया और इसे न केवल एक धार्मिक आयोजन बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक समागम भी माना। उनके अनुसार, महाकुंभ में हर व्यक्ति को अपने जीवन में एक नए संकल्प और बदलाव की प्रेरणा मिलती है।

धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान

प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अपनी बातें रखते हुए होसबाले ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए समाज के हर वर्ग से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रचार और प्रसार अनिवार्य है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों से जुड़ी रहें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि धर्म और संस्कृति की रक्षा केवल संत समाज या शासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की सज्जन शक्ति, संत शक्ति और शासन शक्ति के समन्वित प्रयासों से ही संभव हो सकता है।

सफाईकर्मियों का योगदान और सम्मान

दत्तात्रेय होसबाले के महाकुंभ यात्रा के दूसरे दिन, उन्होंने कुंभ क्षेत्र में सफाई व्यवस्था में लगे कर्मचारियों से मुलाकात की और उनके योगदान को सराहा। उन्होंने इन सफाईकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान अतुलनीय है, क्योंकि वे इस भव्य आयोजन की पवित्रता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सफाईकर्मियों के प्रति उनका सम्मान इस बात का प्रतीक था कि इस आयोजन की सफाई और व्यवस्था में लगे हर व्यक्ति का योगदान समाज के लिए मूल्यवान है।

नई पीढ़ी को सनातन धर्म से जोड़ने की आवश्यकता

होसबाले ने इस दौरान एक और महत्वपूर्ण बिंदु पर जोर दिया, वह था युवाओं को सनातन धर्म और उसकी संस्कृति से जोड़ने की आवश्यकता। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति और उसके मूल्यों के प्रति आस्था और समझ जागृत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए परिवार, समाज और धार्मिक संगठनों के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है। होसबाले का कहना था कि यदि युवाओं को धर्म और संस्कृति की गहराई से परिचित कराया जाए, तो वे इसके महत्व को समझेंगे और इसे अपने जीवन में उतारेंगे।

महाकुंभ में श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार

महाकुंभ के प्रमुख स्नान पर्व, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या और वसंत पंचमी सम्पन्न हो चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ है। हर दिन देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु संगम में आस्था की डुबकी लगाने के लिए पहुंच रहे हैं। उनके जोश और आस्था का यह ज्वार प्रयागराज के हर कोने में महसूस किया जा सकता है। बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। रेलवे और परिवहन विभाग ने अतिरिक्त ट्रेनों और बसों की व्यवस्था की है ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

इस प्रकार, महाकुंभ केवल एक धार्मिक मेला नहीं बल्कि एक सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन बन चुका है, जो श्रद्धालुओं को जीवन की नई दिशा और धर्म के महत्व का एहसास कराता है। इस दौरान दत्तात्रेय होसबाले का आह्वान और मार्गदर्शन न केवल समाज को जागरूक करने वाला था, बल्कि यह इस आयोजन की वैभवता और महत्ता को और भी बढ़ाने वाला था।

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