April 17, 2026

मानसिक मंदित युवती से गैंगरेप कर फरार हुए बदमाशों से पुलिस की मुठभेड़, एक को लगी गोली, दूसरा गिरफ्तार

लखनऊ – राजधानी में एक बार फिर शर्मनाक घटना सामने आई, जहां एक 19 वर्षीय मानसिक मंदित युवती के साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम देकर आरोपी फरार हो गए थे। मामले में पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए रविवार देर रात आरोपियों को घेर लिया, जिसके बाद मुठभेड़ हुई। इस दौरान पुलिस की गोली लगने से एक बदमाश घायल हो गया, जबकि दूसरा मौके पर ही दबोच लिया गया।

गैंगरेप की वारदात से मुठभेड़ तक का पूरा मामला

घटना लखनऊ के मोहनलालगंज इलाके की है। शुक्रवार दोपहर जगन्नाथगंज निवासी 19 वर्षीय मानसिक मंदित युवती घर से सामान खरीदने निकली थी। इसी दौरान रास्ते में मौजूद चौकीदार रामफेर ने बहाने से उसे रोक लिया। इसके बाद आजमगढ़ निवासी टाइल्स कारीगर संदीप यादव और गोसाईंगंज सेमनापुर निवासी पुट्टी कारीगर मायाराम उसे जबरन कोठरी में ले गए और बंधक बनाकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। विरोध करने पर बदमाशों ने उसे बेरहमी से पीटा और वहां से फरार हो गए।

शुक्रवार को हुए इस जघन्य अपराध के बावजूद चौबीस घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिससे पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे। डीसीपी साउथ निपुण अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल रोड चौकी इंचार्ज अनिरुद्ध और खुजौली चौकी प्रभारी अनुज को लाइन हाजिर कर दिया। साथ ही, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छह टीमें गठित की गईं।

मुठभेड़ में गोली लगने से घायल हुआ एक बदमाश, दूसरा गिरफ्तार

रविवार रात पुलिस को सूचना मिली कि गैंगरेप के आरोपी हुलासखेड़ा पचौरी के पास देखे गए हैं। इसी दौरान चेकिंग के दौरान बाइक सवार दो संदिग्ध नजर आए। पुलिस ने जब उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो उन्होंने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें टाइल्स कारीगर संदीप यादव घायल हो गया। संदीप बाइक पर पीछे बैठा था और पुलिस के घेरने पर उसने फायरिंग शुरू कर दी थी।

गोली लगते ही बदमाशों की बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई, जिसके बाद पुट्टी कारीगर मायाराम ने भागने की कोशिश की, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने दौड़कर उसे दबोच लिया।

मुख्य साजिशकर्ता चौकीदार भी हिरासत में, जांच जारी

पुलिस ने मौके से 315 बोर का तमंचा और कारतूस बरामद किया है। इसके साथ ही, चौकीदार रामफेर और उसके बेटे शंकर को भी हिरासत में लिया गया है, क्योंकि मामले में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस इन दोनों से गहन पूछताछ कर रही है कि क्या वे अपराध में सीधे शामिल थे या उन्होंने आरोपियों की मदद की।

तेजी से हो रही जांच, पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

इस घटना के बाद स्थानीय पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एफआईआर दर्ज करने में देरी क्यों हुई। हालांकि, डीसीपी ने तत्परता दिखाते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की और आरोपियों को दबोचने के लिए सक्रियता से काम किया। पुलिस की मुठभेड़ से साफ है कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि किस तरह असुरक्षित माहौल में मानसिक रूप से अस्वस्थ युवतियां भी दरिंदों का शिकार हो रही हैं। अब पुलिस की अगली चुनौती यह होगी कि पीड़िता को न्याय मिले और दोषियों को कठोरतम सजा दी जाए।

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