भारत में क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रीयता की बहस क्यों? उपराष्ट्रपति धनखड़ की बड़ी चेतावनी
बेंगलुरु – उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शुक्रवार को कर्नाटक वैभव साहित्य और सांस्कृतिक महोत्सव के उद्घाटन समारोह में एक गंभीर चेतावनी देते हुए कहा कि देश को विभाजनकारी ताकतों से सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रीयता के मुद्दे को उठाते हुए इसे “बेतुका और राष्ट्रविरोधी ताकतों से प्रेरित” बताया।
“यह चुनौती जलवायु परिवर्तन से भी गंभीर”
धनखड़ ने अपने संबोधन में कहा कि देश में कुछ ताकतें नफरत और बंटवारे का माहौल बना रही हैं। उन्होंने आगाह किया कि यह चुनौती जलवायु परिवर्तन से भी ज्यादा गंभीर है। जाति और क्षेत्रीयता के नाम पर समाज को बांटने की कोशिशें हो रही हैं, जिनका कड़ा जवाब देना आवश्यक है।
“न्यायपालिका तक पहुंच को हथियार बनाया जा रहा”
धनखड़ ने यह भी कहा कि कुछ लोग न्यायालय का इस्तेमाल राष्ट्रविरोधी भावना बढ़ाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा,
“संविधान ने हर नागरिक को न्यायपालिका तक पहुंचने का अधिकार दिया है, लेकिन अब इसे एक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह भारत को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है, जो दुनिया के किसी भी अन्य देश में देखने को नहीं मिलता।”
“हम खुद अपनी जड़ें क्यों काट रहे हैं?”
राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को संजोने की जरूरत पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने चिंता व्यक्त की कि कुछ लोग उसी टहनी को काटने की कोशिश कर रहे हैं, जिस पर वे बैठे हैं। उन्होंने कहा,
“जब मैं भारत की प्रगति को देखता हूं, तो यह मोर की तरह खूबसूरत दिखती है, लेकिन जब उसके पैरों की ओर देखता हूं, तो चिंता होती है। हमें यह समझना होगा कि हम अपनी ही जड़ों को कमजोर क्यों कर रहे हैं?”
“भारत की चुनावी प्रक्रिया को किया जा रहा प्रभावित”
देश में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशों पर भी धनखड़ ने चिंता जताई। उन्होंने कहा,
“भारत दुनिया का सबसे पुराना, सबसे मजबूत और सबसे प्रगतिशील लोकतंत्र है। लेकिन आज इसे कुप्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, और यह उन लोगों द्वारा किया जा रहा है जिनकी इसमें भागीदारी नहीं होनी चाहिए।”
“भारत पर टिकी है दुनिया की नजर”
भारत की आर्थिक प्रगति पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि वैश्विक संस्थाएं जैसे IMF और वर्ल्ड बैंक भारत को निवेश के लिए सबसे उभरता हुआ बाजार मान रहे हैं। उन्होंने कहा,
“आज पूरी दुनिया देख रही है कि भारत एक चमकता हुआ सितारा बन चुका है। निवेश, अवसर और प्रतिभा को बढ़ाने के लिए यह सबसे पसंदीदा देश है।”
क्या भारत में बढ़ेगा क्षेत्रवाद बनाम राष्ट्रीयता का टकराव?
धनखड़ की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत में क्षेत्रीय राजनीति और राष्ट्रवाद को लेकर नई बहस छिड़ी हुई है। क्या देश में बढ़ती राजनीतिक और सामाजिक खींचतान लोकतंत्र के लिए खतरा बन सकती है? या फिर भारत इन चुनौतियों का डटकर सामना करेगा? आने वाले स
मय में इसका असर साफ नजर आएगा।
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