April 17, 2026

तेलंगाना टनल हादसा: पांच दिन से फंसे मजदूर, बचाव मिशन में जुटी एजेंसियां—क्या कोई चमत्कार होगा?

नागरकुरनूल, तेलंगाना: श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल (SLBC) सुरंग में फंसे आठ मजदूरों को निकालने की कोशिशें पांचवें दिन भी जारी हैं, लेकिन अभी तक उनसे कोई संपर्क नहीं हो सका है। NDRF की टीम मंगलवार को उस जगह तक पहुंचने में सफल रही, जहां सुरंग ढही थी, लेकिन पानी, कीचड़ और मलबे के चलते राहत अभियान में लगातार मुश्किलें आ रही हैं।

 

रैट माइनर्स को सौंपी गई जिम्मेदारी, क्या इतिहास दोहराएंगे?

 

इस ऑपरेशन में रैट माइनर्स को शामिल किया गया है, जिन्होंने 2023 में उत्तराखंड की सिल्क्यारा टनल में फंसे 41 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला था। फिलहाल वे सुरंग में घुसने के वैकल्पिक रास्तों का आकलन कर रहे हैं। बचाव दल मलबे और मिट्टी हटाने के लिए हर संभव तरीका अपना रहा है, लेकिन मजदूरों के जिंदा बचने की संभावना अब बेहद कम होती जा रही है।

 

टनल का पानी बना सबसे बड़ी चुनौती

 

राज्य के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने बताया कि सुरंग के अंदर पानी और मलबे का तेज बहाव राहत अभियान में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है। बचाव दल को अंदर ऑक्सीजन पहुंचाने और पानी निकालने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कन्वेयर बेल्ट को फिर से शुरू करने की कोशिश की जा रही है, जिससे सुरंग से मलबा हटाया जा सके।

 

11 एजेंसियां जुटीं, लेकिन सफलता कब?

 

इस बचाव अभियान में सेना, नौसेना, मार्कोस कमांडो, NDRF, SDRF, भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI), राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) सहित कुल 11 राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां जुटी हुई हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।

 

परिवार का इंतजार—कहीं उम्मीदें टूट न जाएं!

 

सुरंग में फंसे सनी सिंह के परिवार की बेचैनी बढ़ती जा रही है। जम्मू-कश्मीर में बैठे उनके छोटे भाई राजेश ने कहा, “पिछले चार दिनों से भाई से कोई संपर्क नहीं हुआ, हर पल सिर्फ अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।” सनी की मां भी बेटे की सलामती के लिए दुआ कर रही हैं, लेकिन हर गुजरते पल के साथ उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।

 

“सरकार हार नहीं मानेगी”—उपमुख्यमंत्री का बड़ा बयान

 

राज्य के उपमुख्यमंत्री भट्टी विक्रमार्क ने स्पष्ट किया है कि सरकार किसी भी हाल में हार नहीं मानेगी। उन्होंने कहा, “जब तक सुरंग में फंसे आठ लोगों को बाहर नहीं निकाला जाता, तब तक बचाव अभियान जारी रहेगा।” सरकार ने इस मिशन के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से भी संपर्क साधा है, जिन्हें इस तरह की स्थितियों में काम करने का अनुभव है।

 

आखिरी उम्मीद या अंतिम समय?

 

फंसे हुए मजदूरों को बचाने की कोशिशें तेज हैं, लेकिन समय बीतने के साथ ही संभावनाएं धुंधली होती जा रही हैं। क्या तेलंगाना की इस सुरंग में भी उत्तराखंड जैसा चमत्कार होगा या यह हादसा मजदूरों के परिवारों के लिए द

र्दनाक अंत बनकर रह जाएगा?

 

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!