Waqf Amendment Bill 2025: वक्फ बिल ने ली चिंगारी… और जल उठे शहर!”
देश की संसद से पास हो चुके वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को लेकर पूरे देश में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विरासत स्थलों की सुरक्षा का प्रयास बता रही है, वहीं दूसरी ओर इसे अल्पसंख्यक समुदाय और छात्र संगठनों द्वारा ‘असंवैधानिक’ और ‘सांप्रदायिक’ करार दिया जा रहा है। शुक्रवार, 4 अप्रैल को देश के कई हिस्सों में इस बिल के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए—मुंबई, कोलकाता, हैदराबाद, इंफाल, चेन्नई, रांची, अहमदाबाद, लखनऊ समेत दर्जनों शहरों में सड़कों पर नाराजगी नजर आई।
जामिया में छात्रों का प्रदर्शन और प्रशासन का तानाशाही रवैया
दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में भी छात्रों ने बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और अन्य छात्र समूहों के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन ने गेट बंद कर दिए और छात्रों को बाहर निकलने से रोका। लेकिन जैसे-जैसे छात्रों की संख्या बढ़ी, दबाव में आकर प्रशासन को गेट खोलने पड़े। छात्रों ने बिल की प्रतियां जलाईं और इसे ‘छात्रों की आवाज़ दबाने की कोशिश’ बताया।
कोलकाता से इंफाल तक विरोध की गूंज
कोलकाता के पार्क सर्कस, हैदराबाद, इंफाल घाटी और रांची जैसे इलाकों में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों ने बिल के खिलाफ प्रदर्शन किया। इंफाल में संथेल ईदगाह पर 200 से अधिक लोगों ने एकत्र होकर वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता पर सवाल उठाए और सरकार से बातचीत की मांग की। रांची में एकरा मस्जिद के पास पोस्टर और बैनर लेकर लोगों ने बिल को तुरंत वापस लेने की मांग की।
गुजरात में AIMIM के नेता समेत 40 लोग हिरासत में
गुजरात के अहमदाबाद में AIMIM की राज्य इकाई के प्रमुख सहित करीब 40 प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। आरोप था कि प्रदर्शन बिना अनुमति के किया जा रहा था। वहीं, पुलिस का कहना था कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
तमिलनाडु में विजय की पार्टी TVK का राज्यव्यापी प्रदर्शन
तमिल फिल्मों के सुपरस्टार से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने भी बिल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी महासचिव एन. आनंद के नेतृत्व में मदुरै, कोयंबटूर, तंजावुर, तिरुचिरापल्ली सहित कई शहरों में प्रदर्शन किया गया और विधेयक को ‘संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ’ बताया गया।
राजनीतिक उबाल: रालोद नेता और कांग्रेस पदाधिकारी का इस्तीफा
वक्फ संशोधन बिल का समर्थन करने पर रालोद के अंदर भी विरोध की चिंगारी भड़क उठी। मेरठ से पार्टी के प्रदेश महासचिव शाहजेब रिजवी ने पार्टी छोड़ दी और अपना इस्तीफा जयंत चौधरी को भेज दिया। वहीं केरल में कांग्रेस के इडुक्की जिला महासचिव बेनी पेरुवन्थानम ने भी इसी मुद्दे को लेकर पार्टी छोड़ दी।
उत्तर प्रदेश में अलर्ट, ड्रोन से निगरानी
उत्तर प्रदेश में वक्फ बिल को लेकर विशेष सतर्कता बरती गई। लखनऊ से लेकर मेरठ, सहारनपुर और बिजनौर तक पुलिस हाई अलर्ट पर रही। फ्लैग मार्च निकाले गए, ड्रोन से संवेदनशील इलाकों की निगरानी की गई और वरिष्ठ अधिकारी खुद सड़कों पर मौजूद रहे ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
विधेयक का उद्देश्य और बढ़ता विरोध
सरकार का कहना है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक का मकसद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना और ऐतिहासिक स्थलों की रक्षा करना है। इसके साथ ही वक्फ बोर्ड और स्थानीय निकायों के बीच बेहतर समन्वय बनाना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। लेकिन प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को सरकारी नियंत्रण में लेने की कवायद है और इससे समुदाय की धार्मिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक स्वायत्तता पर खतरा मंडरा रहा है।
क्या बिल होगा वापस?
अब बड़ा सवाल यह है कि इतने व्यापक विरोध के बाद क्या केंद्र सरकार इस बिल को वापस लेगी? क्या प्रदर्शन और राजनीतिक दबाव इसे पलटने में सक्षम होंगे? या यह विरोध भी अन्य विवादास्पद विधेयकों की तरह समय के साथ शांत हो जाएगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल देशभर में वक्फ बिल को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल गर्म है।
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