April 17, 2026

राहुल गांधी के बयान पर दिल्ली यूनिवर्सिटी का पलटवार, कहा— बयान देने से पहले तथ्यों की जांच करें

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कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के एक बयान को लेकर University of Delhi (दिल्ली यूनिवर्सिटी) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच से कोई भी टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की सही जानकारी लेना जरूरी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि विश्वविद्यालय में प्रवेश की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और तय नियमों के अनुसार होती है, इसलिए इस तरह के आरोप निराधार हैं।

 

दिल्ली यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में स्नातक और कई अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिला पूरी तरह से Common University Entrance Test (CUET) के अंकों के आधार पर होता है। विश्वविद्यालय के अनुसार अधिकांश ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स में इंटरव्यू की कोई अनिवार्यता नहीं है। ऐसे में यह कहना कि छात्रों को इंटरव्यू के जरिए जाति के आधार पर बाहर किया जाता है, तथ्यात्मक रूप से गलत है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि इस तरह के बयान छात्रों और शिक्षकों के बीच अनावश्यक भ्रम और नकारात्मक माहौल पैदा कर सकते हैं।

 

विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह भी कहा कि अगर राहुल गांधी का संकेत फैकल्टी भर्ती प्रक्रिया की ओर था, तो हाल के वर्षों में सभी वर्गों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के मुताबिक भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और आरक्षण नीति के अनुरूप की जाती है। संस्थान ने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां विश्वविद्यालय की साख को प्रभावित करती हैं और शैक्षणिक माहौल को नुकसान पहुंचाती हैं, इसलिए जिम्मेदार पद पर बैठे नेताओं को बयान देते समय अधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

 

दरअसल, शुक्रवार को उत्तर प्रदेश की राजधानी Lucknow में आयोजित कांशीराम जयंती पर एक संविधान सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में इंटरव्यू की प्रक्रिया का इस्तेमाल छात्रों को उनकी जाति के आधार पर बाहर करने के लिए किया जाता है। राहुल गांधी ने कहा कि जब छात्र इंटरव्यू देने जाते हैं तो उनसे उनकी जाति पूछी जाती है और इसी आधार पर उन्हें फेल कर दिया जाता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह तरीका सामाजिक बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ है।

 

अपने संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के ढांचे में पिछड़े वर्गों, दलितों और आदिवासियों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता। राहुल गांधी ने कहा कि अगर RSS के प्रचारकों और प्रमुख पदाधिकारियों की सूची देखी जाए तो उनमें OBC, दलित और आदिवासी समुदाय के लोगों की भागीदारी बहुत कम दिखाई देती है। उनके अनुसार यह व्यवस्था संविधान की भावना के विपरीत है और समाज में असमानता को बढ़ावा देती है।

 

राहुल गांधी के इन आरोपों के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा और शोध का केंद्र है और यहां प्रवेश व नियुक्ति की प्रक्रियाएं पूरी तरह पारदर्शी हैं। संस्थान ने दोहराया कि तथ्यों से परे दिए गए बयान न केवल भ्रम फैलाते हैं बल्कि छात्रों और शिक्षकों के बीच अनावश्यक विवाद भी पैदा करते हैं। इसी वजह से विश्वविद्यालय ने राहुल गांधी से अपील की कि भविष्य में किसी भी टिप्पणी से पहले तथ्यात्मक जानकारी की जांच जरूर कर लें।

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