पश्चिम बंगाल: चुनाव से पहले राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस के इस्तीफे पर सियासी घमासान, ममता बनर्जी ने ‘दिल्ली के दबाव’ का लगाया आरोप
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। राज्यपाल C. V. Ananda Bose के अचानक इस्तीफे ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। गुरुवार शाम उनके इस्तीफे की खबर सामने आते ही राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। राज्य में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे समय में राज्यपाल के पद से उनका हटना कई सवाल खड़े कर रहा है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस पूरे घटनाक्रम पर हैरानी जताते हुए इसके पीछे राजनीतिक दबाव की आशंका व्यक्त की है।
राज्यपाल के इस्तीफे के तुरंत बाद केंद्र सरकार ने नए राज्यपाल की नियुक्ति भी कर दी। जानकारी के मुताबिक R. N. Ravi को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया गया है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी है। बताया गया कि बोस ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को भेज दिया था, जिसके बाद केंद्र ने राज्यपालों के तबादले और नई नियुक्तियों से जुड़ा फैसला लिया। इस फैसले के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले की जानकारी केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah की ओर से दी गई। ममता बनर्जी का आरोप है कि विधानसभा चुनाव से पहले कुछ राजनीतिक हितों को साधने के लिए राज्यपाल पर दबाव बनाया गया हो सकता है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी पोस्ट करते हुए कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए उन्हें इस फैसले पर हैरानी नहीं है और यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ लगता है।
दूसरी ओर, राज्य की सियासत में यह मुद्दा इसलिए भी अहम हो गया है क्योंकि कुछ ही दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस चुनाव में सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है। तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। ऐसे समय में राज्यपाल के अचानक इस्तीफे को लेकर कई तरह की राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि राज्यपाल के इस्तीफे के पीछे किसी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है, बल्कि यह फैसला स्वास्थ्य संबंधी कारणों से लिया गया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि सी.वी. आनंद बोस ने 17 नवंबर 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का पद संभाला था। उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक चलना था, लेकिन उन्होंने करीब 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इससे पहले राज्य के पूर्व राज्यपाल Jagdeep Dhankhar भी अपना कार्यकाल पूरा किए बिना पद छोड़ चुके हैं। ऐसे में लगातार दूसरी बार राज्यपाल के समय से पहले इस्तीफे ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
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