April 20, 2026
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शुक्रवार, 6 मार्च 2026 को चैत्र कृष्ण तृतीया तिथि है और आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी का पावन व्रत भी शुरू हो रहा है। भगवान गणेश का यह स्वरूप जीवन की बाधाओं को दूर कर बड़ी इच्छाएं पूरी करने वाला माना जाता है। आज चंद्रदेव कन्या राशि और हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे, जिसके स्वामी स्वयं चंद्रदेव हैं।

 

हस्त नक्षत्र की ऊर्जा व्यक्ति को साहसी, मेहनती और लक्ष्यों के प्रति समर्पित बनाती है। गंड योग और विष्टि करण के समय अपनी वाणी में सहजता रखें और विवादों को सुधार के संकेत के रूप में समझें। दिन के सही संचालन के लिए दोपहर 12:09 बजे से 12:56 बजे तक के अभिजीत मुहूर्त का लाभ उठाएं।

 

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव हस्त नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

हस्त नक्षत्र: प्रातः 09:29 बजे तक

सामान्य विशेषताएं: निडर, साहसी, उपकारी, दानी, मेहनती, फुर्तीला, लक्ष्य के प्रति समर्पित, बुद्धिमान, कभी-कभी झगड़ालू, कठोर, जीवन के उत्तरार्ध में सुखी, शारीरिक कार्यों में निपुण।

नक्षत्र स्वामी: चंद्रदेव

राशि स्वामी: बुधदेव

देवता: सविता (सूर्य देव का एक रूप)

प्रतीक: हाथ या बंद मुट्ठी

आज भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी है

 

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को भालचंद्र संकष्टी के नाम से जाना जाता है। इस विशेष दिन पर भगवान गणेश के ‘भालचंद्र’ स्वरूप की पूजा की जाती है। भालचंद्र का अर्थ है वह जिनके मस्तक पर चंद्रमा विराजमान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत जीवन में आने वाली बड़ी से बड़ी बाधाओं को दूर करने का एक उत्तम माध्यम माना जाता है। गणेश जी की कृपा से भक्तों की सभी बड़ी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन का सही संचालन होता है।

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