April 17, 2026

सोने की चमक ने बढ़ाई बैंकों की रफ्तार! पर्सनल और कार लोन को पीछे छोड़ जनवरी का ‘सुपरहिट’ प्रोडक्ट बना गोल्ड लोन

देश में कर्ज लेने के पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां अब पर्सनल और कार लोन की तुलना में गोल्ड लोन लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार सोने के बदले दिए जाने वाले कर्ज में जनवरी महीने के दौरान साल-दर-साल 128 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो एक साल पहले 91 फीसदी थी। भारतीय रिजर्व बैंक के मासिक सेक्टोरल डेटा से यह संकेत मिलता है कि आर्थिक अनिश्चितताओं और त्वरित फंड की जरूरत के बीच लोगों का भरोसा गोल्ड लोन पर तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की स्थिर कीमत और आसान प्रोसेसिंग के कारण यह कर्ज का लोकप्रिय माध्यम बनता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को दिए जाने वाले कर्ज में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। इस क्षेत्र में साल-दर-साल 62 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि एक वर्ष पहले यह वृद्धि दर 40 फीसदी थी। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि बैंक स्वच्छ ऊर्जा और हरित परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता में तेजी ला रहे हैं। इसके विपरीत एक्सपोर्ट क्रेडिट में गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी में निर्यात से जुड़े कर्ज में 17.2 फीसदी की कमी आई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 7 फीसदी बढ़ा था। माना जा रहा है कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बदलते टैरिफ इसका प्रमुख कारण हैं।

कुल बैंकिंग गतिविधियों पर नजर डालें तो नॉन-फूड क्रेडिट में साल-दर-साल 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो एक वर्ष पहले 11 फीसदी थी। वहीं रिटेल लोन सेगमेंट में भी मजबूत बढ़ोतरी जारी रही और इसमें 15 फीसदी की सालाना वृद्धि देखी गई। रिटेल श्रेणी में एजुकेशन लोन दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला सेगमेंट रहा, जिसमें जनवरी 2026 में 14 फीसदी की वृद्धि दर्ज हुई। इसके अलावा कॉर्पोरेट सेक्टर में भी कर्ज वितरण बढ़कर 12 फीसदी हो गया, जो पिछले साल 8 फीसदी था। औद्योगिक क्षेत्रों में जेम्स एंड ज्वेलरी तथा इंजीनियरिंग सेक्टर में सबसे अधिक 36 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उद्योग जगत में निवेश गतिविधियों के बढ़ने के संकेत मिलते हैं।

बैंकिंग प्रणाली में क्रेडिट और डिपॉजिट के आंकड़ों से भी अहम संकेत मिले हैं। 15 फरवरी को समाप्त पखवाड़े में बैंक क्रेडिट साल-दर-साल 13.6 फीसदी बढ़ा, जबकि डिपॉजिट ग्रोथ 11.2 फीसदी रही। इस तरह कर्ज की रफ्तार जमा राशि की तुलना में अधिक रही, जिससे क्रेडिट-डिपॉजिट अनुपात बढ़कर 82.47 फीसदी तक पहुंच गया। हालांकि हाल के आंकड़ों में पिछले पखवाड़े की तुलना में थोड़ी गिरावट भी देखी गई है। 31 जनवरी को समाप्त अवधि में बैंक क्रेडिट ग्रोथ 14.6 फीसदी और डिपॉजिट ग्रोथ 12.5 फीसदी दर्ज की गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि गोल्ड लोन में तेजी से बढ़ती मांग भारतीय अर्थव्यवस्था में उपभोक्ताओं के बदलते वित्तीय व्यवहार को दर्शाती है। आसान उपलब्धता, कम जोखिम और तत्काल नकदी की सुविधा के कारण यह कर्ज का भरोसेमंद विकल्प बन रहा है। साथ ही रिन्यूएबल एनर्जी और कॉर्पोरेट सेक्टर में बढ़ती लेंडिंग आर्थिक गतिविधियों में तेजी का संकेत देती है। हालांकि निर्यात क्षेत्र में गिरावट और क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर जैसे संकेत बैंकिंग क्षेत्र के लिए चुनौतियां भी पेश करते हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में कर्ज वितरण और आर्थिक गतिविधियों की दिशा पर बाजार और नीति निर्माताओं की नजर बनी रहेगी।

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