संघर्ष में कितनी मौतें? अफगानिस्तान–पाकिस्तान टकराव में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे, सैनिकों से लेकर नागरिकों तक भारी नुकसान
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते सीमा संघर्ष को लेकर दोनों देशों की ओर से नुकसान के अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के जरिए घटनाओं की अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। जहां अफगानिस्तान ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना ने आम नागरिकों को निशाना बनाया, वहीं पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों के खिलाफ थी। इस टकराव ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है और दोनों देशों के बीच हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
पाकिस्तान के अनुसार इस सैन्य कार्रवाई में 274 से 297 तक अफगान लड़ाकों या मिलिटेंट्स की मौत हुई है, जबकि करीब 400 लोग घायल हुए हैं। पाकिस्तान ने यह भी दावा किया है कि इस संघर्ष में उसके 12 सैनिक मारे गए, 27 घायल हुए और एक सैनिक लापता है। पाकिस्तानी सेना ने इस सैन्य अभियान को “गजब लिल हक” नाम दिया है। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा कारणों से की गई और इसका उद्देश्य सीमा पार से होने वाली गतिविधियों को रोकना था।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के दावों को खारिज करते हुए कहा है कि उनके जवाबी हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई है। अफगान पक्ष का यह भी दावा है कि वह 23 पाकिस्तानी सैनिकों के शव अपने साथ अफगानिस्तान ले आया है। साथ ही तालिबान प्रशासन ने बताया कि इस संघर्ष में उनके आठ लड़ाके मारे गए और 11 घायल हुए हैं। अफगानिस्तान का कहना है कि उसने पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाते हुए 19 सैन्य पोस्ट और बेस तबाह कर दिए।
संघर्ष में नागरिकों के नुकसान को लेकर भी गंभीर स्थिति सामने आई है। अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी हमलों में 18 से 19 नागरिकों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं, जबकि 26 लोग घायल हुए हैं। यह घटनाएं विशेष रूप से खोस्त और पक्तिका प्रांतों में सामने आई हैं। नागरिकों की मौतों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है और दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के दावों में भारी अंतर होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन करना फिलहाल मुश्किल है। सीमा क्षेत्र में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। यदि हालात जल्द नियंत्रित नहीं हुए तो यह संघर्ष व्यापक रूप ले सकता है, जिससे न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित होने की आशंका है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस टकराव पर टिकी हुई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति को शांत करने के प्रयासों पर जोर दे रहा है।
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