ईरान की एक रिवोल्यूशनरी कोर्ट ने जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामले में मोहम्मद अब्बासी नाम के व्यक्ति को फांसी की सजा सुनाई है। परिवार के करीबी सूत्रों के मुताबिक अब्बासी पर “खुदा के खिलाफ दुश्मनी” का आरोप लगाया गया है। इसे जनवरी में हुए बड़े प्रदर्शनों से जुड़ा पहला मौत का फैसला माना जा रहा है। हालांकि ईरान की न्यायपालिका की ओर से इस सजा की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है।
इस फैसले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देता है तो संयुक्त राज्य अमेरिका कड़ी कार्रवाई कर सकता है। वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार ने इस मामले में सख्त रुख बनाए रखा है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, ईरान में बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट से परेशान लोगों ने 28 दिसंबर से सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू किए थे। इन प्रदर्शनों को 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद देश का सबसे गंभीर आंतरिक संकट माना गया। शुरुआत आर्थिक मुद्दों से हुई यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे सरकार और धार्मिक नेतृत्व के खिलाफ व्यापक आंदोलन में बदल गया, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की थी।
प्रदर्शनों में मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। सरकार का दावा है कि इन घटनाओं में 3,000 से अधिक लोग मारे गए और इसके लिए आतंकी गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया गया। वहीं अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठन HRANA का कहना है कि मृतकों की संख्या 7,000 से ज्यादा हो सकती है, जिनमें बड़ी संख्या प्रदर्शनकारियों की बताई गई है।
इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर भी तनाव बना हुआ है। ओमान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अब तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने विमानवाहक पोत भी तैनात किए हैं, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई है।
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