April 17, 2026
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18 फरवरी 2026 को फाल्गुन मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि है। आज कुंभ राशि में सूर्यदेव, चंद्रदेव, बुधदेव, शुक्रदेव और राहु का एक साथ होना एक असाधारण ज्योतिषीय घटना है। पाँच ग्रह जब एक ही घर में बैठे हों तो इस स्थिति को स्टेलियम कहा जाता है। चंद्रदेव आज शतभिषा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, जिससे आपकी बुद्धि तेज होगी लेकिन आलस्य रहने की प्रवृति हो सकती है। मकर राशि में उच्च अवस्था के मंगलदेव आपके भीतर कार्यों को पूरा करने का जोश और साहस बनाए रखने में पूरी मदद करेंगे।

 

 

 

आज शिव योग बन रहा है, जो कार्यों में सफलता देने का प्रतीक है। आज पंचांग के अनुसार अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है, इसलिए शुभ कार्यों के लिए दोपहर 02:04 से 03:40 तक के अमृत काल का लाभ उठाना उचित रहेगा। दोपहर 12:35 से 02:00 बजे तक राहुकाल रहेगा, इस समय थोड़ा सावधान रहें और किसी भी नए निवेश या बड़े फैसले से बचें।

 

महत्वपूर्ण विवरण

तिथि: शुक्ल प्रतिपदा – सायं 04:57 बजे तक

योग: शिव – रात्रि 10:45 बजे तक

करण: बव – सायं 04:57 बजे तक

करण: बालव – प्रातः 04:31 बजे तक (19 फरवरी)

 

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

सूर्योदय का समय: प्रातः 06:57 बजे

सूर्यास्त का समय: सायं 06:13 बजे

चंद्रोदय का समय: प्रातः 07:23 बजे

चंद्रास्त का समय: सायं 07:10 बजे

 

समस्त नव ग्रहों की की राशियां (प्रात: 06: 00 बजे)

सूर्य देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

चन्द्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

मंगल देव: मकर राशि में स्थित हैं।

बुध देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

गुरु बृहस्पति: मिथुन राशि में स्थित हैं।

शुक्र देव: कुंभ राशि में स्थित हैं।

शनि देव: मीन राशि में स्थित हैं।

राहु: कुंभ राशि में स्थित हैं।

केतु: सिंह राशि में स्थित हैं।

 

आज के शुभ मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त: आज अभिजीत मुहूर्त नहीं है

अमृत काल: दोपहर 02:04 बजे से 03:40 बजे तक

 

आज के अशुभ समय

राहुकाल: दोपहर 12:35 बजे से 02:00 बजे तक

गुलिकाल: प्रातः 11:11 बजे से 12:35 बजे तक

यमगण्ड: प्रातः 08:22 बजे से 09:46 बजे तक

 

आज का नक्षत्र

आज चंद्रदेव शतभिषा नक्षत्र में विराजमान रहेंगे।

शतभिषा नक्षत्र: सायं 09:16 बजे तक

सामान्य विशेषताएं: तेज बुद्धि, सबके प्रिय, स्वतंत्र, धैर्यवान, आलसी, सीमाओं को तोड़ने की प्रवृत्ति, महत्वाकांक्षी और जिज्ञासु

नक्षत्र स्वामी: राहु

राशि स्वामी: शनि देव

देवता: वरुण (जल देवता)

प्रतीक: खाली घेरा

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