April 17, 2026

दक्षिण मुंबई में दिल दहला देने वाली दरिंदगी, मूक-बधिर दिव्यांग युवती से सामूहिक शोषण, DNA जांच में पिता ही निकला आरोपी

मुंबई के पॉश इलाके से सामने आई यह घटना समाज की रूह कंपा देने वाली सच्चाई को उजागर करती है। दक्षिण मुंबई में रहने वाली एक मूक-बधिर और मानसिक रूप से दिव्यांग युवती के साथ हुई दरिंदगी ने न सिर्फ कानून व्यवस्था बल्कि सामाजिक संवेदनाओं पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया, जब युवती को पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया और जांच में पता चला कि वह पांच महीने की गर्भवती है। युवती न बोल पाने की स्थिति में थी और न ही वह अपनी पीड़ा को ठीक से समझा या बयान कर सकती थी, जिससे यह मामला और भी संवेदनशील हो गया।

जानकारी के अनुसार, सितंबर महीने में युवती ने अपनी दादी से पेट में दर्द की शिकायत की थी, जिसके बाद उसे दक्षिण मुंबई के कामा एंड एल्ब्लेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने जब मेडिकल जांच की, तो वे सन्न रह गए। युवती के गर्भवती होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। पुलिस की निगरानी में आगे की मेडिकल प्रक्रिया शुरू की गई और पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को प्राथमिकता दी गई।

पुलिस जांच में धीरे-धीरे चौंकाने वाले खुलासे सामने आए। जांच में पता चला कि पीड़िता न केवल मूक-बधिर है, बल्कि मानसिक रूप से भी दिव्यांग है, जिसका फायदा उठाकर कई लोगों ने उसके साथ बार-बार यौन शोषण किया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में कुल 16 लोगों पर संदेह जताया गया, जिनमें पीड़िता का अपना पिता भी शामिल था। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि गर्भ में पल रहे बच्चे का जैविक पिता कौन है, ताकि मुख्य आरोपी की पहचान हो सके।

इस चुनौती को सुलझाने के लिए पुलिस ने सभी 16 संदिग्धों के DNA सैंपल लिए और उन्हें भ्रूण के जेनेटिक मटेरियल से मिलान के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया। जब DNA रिपोर्ट सामने आई, तो सच ने सबको झकझोर कर रख दिया। रिपोर्ट के अनुसार, गर्भ में पल रहे बच्चे का पिता कोई और नहीं, बल्कि पीड़िता का सगा पिता ही निकला। इस खुलासे ने रिश्तों की मर्यादा और मानवता दोनों को शर्मसार कर दिया।

पुलिस काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने इशारों और टूटी-फूटी भाषा में बताया कि उसके साथ कई लोगों ने गलत किया था। पुलिस ने पहले ही इस मामले में कुछ आरोपियों को हिरासत में लिया था, लेकिन पिता का मुख्य आरोपी के रूप में सामने आना सबसे बड़ा और भयावह सच साबित हुआ। पुलिस के मुताबिक, यह दरिंदगी मार्च से सितंबर 2025 के बीच लगातार होती रही। फिलहाल आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया गया है और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी गहन जांच जारी है।

यह मामला समाज के लिए एक कड़वा सवाल छोड़ जाता है। जिस पिता पर एक दिव्यांग बेटी की सुरक्षा और भरोसा टिका होता है, वही अगर उसका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाए, तो यह केवल एक अपराध नहीं बल्कि पूरे समाज की नैतिक हार है। मूक-बधिर और असहाय पीड़िता की खामोश चीखें आज हम सब से पूछ रही हैं कि क्या हमारा समाज सच में सुरक्षित है, खासकर उनके लिए जो खुद अपनी आवाज भी नहीं उठा सकते।

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