CDSCO की जांच में बड़ा खुलासा, 170 से ज्यादा दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल, 7 निकलीं नकली
देश में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की दिसंबर 2025 में की गई नियमित जांच में 170 से अधिक दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल पाए गए हैं। इसके अलावा 7 दवाएं पूरी तरह नकली निकली हैं, जिन्हें बिना वैध लाइसेंस के बनाकर बाजार में बेचा जा रहा था।
CDSCO की वेबसाइट पर जारी ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हर महीने की तरह दिसंबर में भी नॉन-स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) और नकली दवाओं की सूची सार्वजनिक की गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि केंद्रीय ड्रग लैब द्वारा जांच किए गए 74 सैंपल और राज्यों की ड्रग टेस्टिंग लैब्स के 93 सैंपल तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन दवाओं में शुद्धता, दवा की ताकत, घुलनशीलता और अन्य तकनीकी मानकों में कमी पाई गई है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि 7 दवाएं पूरी तरह नकली थीं। ये दवाएं बिना किसी वैध लाइसेंस के तैयार की गई थीं और नामी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर बाजार में सप्लाई की जा रही थीं। इनमें से 4 सैंपल गाजियाबाद (नॉर्थ ज़ोन) से, जबकि अहमदाबाद, बिहार और महाराष्ट्र से एक-एक नकली दवा के सैंपल पाए गए हैं। इन मामलों में संबंधित एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सैंपल फेल होने का मतलब यह नहीं है कि उस कंपनी की सभी दवाएं खराब हैं। डॉक्टर कवलजीत सिंह के मुताबिक, कई बार पैकेजिंग या स्टोरेज के दौरान बैक्टीरिया प्रवेश कर जाते हैं, जिससे सैंपल फेल हो जाता है। हालांकि, ऐसे मामलों की गंभीर जांच जरूरी है ताकि मरीजों तक सुरक्षित और असरदार दवाएं ही पहुंचें।
CDSCO की यह रिपोर्ट बताती है कि देश में ड्रग मॉनिटरिंग सिस्टम सक्रिय है, लेकिन साथ ही आम लोगों को भी दवाएं खरीदते समय सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी तुरंत स्थानीय ड्रग अथॉरिटी को देने की जरूरत है।
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