आज की तारीख में दुनिया में कौन ज्यादा ताकतवर—सोना या तेल? जवाब जानकर चौंक जाएंगे
पिछले पांच वर्षों में सोना और चांदी दोनों ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है और इन कीमती धातुओं की कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची हैं। वैश्विक अनिश्चितताओं, महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों के बीच गोल्ड को सुरक्षित निवेश माना गया, जिससे इसकी मांग तेजी से बढ़ी। दूसरी ओर कच्चा तेल, जिसे ‘काला सोना’ कहा जाता है, भले ही 2022 के मुकाबले सस्ता हुआ हो, लेकिन आज भी इसकी रणनीतिक और आर्थिक अहमियत कम नहीं हुई है। हालिया अंतरराष्ट्रीय घटनाएं यह दिखाती हैं कि तेल अब भी वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की धुरी बना हुआ है।
अगर मौजूदा समय में सोने और कच्चे तेल की ताकत की तुलना की जाए, तो मार्केट कैप के लिहाज से कच्चा तेल गोल्ड से कहीं आगे नजर आता है। आंकड़ों के मुताबिक, कच्चे तेल का कुल मार्केट कैप सोने से तीन गुना से भी ज्यादा है। दुनिया भर में फैले तेल भंडारों की कुल वैल्यू कई ट्रिलियन डॉलर में आंकी जाती है, जिससे साफ होता है कि कीमतों में गिरावट के बावजूद तेल की पकड़ अब भी बेहद मजबूत है।
हालांकि, अगर दुनिया के सबसे ताकतवर असेट की बात करें तो न तो सोना शीर्ष पर है और न ही कच्चा तेल। असल में यह खिताब रियल एस्टेट के नाम है। वैश्विक स्तर पर जमीन और प्रॉपर्टी की कुल वैल्यू सबसे ज्यादा है। रियल एस्टेट का मार्केट कैप 670 ट्रिलियन डॉलर से भी अधिक बताया जाता है, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा और ताकतवर असेट बनाता है। आने वाले वर्षों में भी इस सेक्टर में लगातार ग्रोथ की उम्मीद जताई जा रही है।
करेंसी के मोर्चे पर भी आम धारणा से तस्वीर थोड़ी अलग है। अमेरिकी डॉलर को सबसे ताकतवर माना जाता है, लेकिन मार्केट कैप के लिहाज से चीन की करेंसी युआन इससे आगे निकल चुकी है। युआन का मार्केट कैप डॉलर और यूरो दोनों से ज्यादा है। वहीं कंपनियों की बात करें तो एआई सेक्टर की दिग्गज कंपनी एनवीडिया सबसे ज्यादा वैल्यूएशन वाली कंपनी बनकर उभरी है, जिसने एप्पल, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को कड़ी टक्कर दी है।
कुल मिलाकर, आज की तारीख में ताकत सिर्फ कीमत से नहीं, बल्कि कुल वैल्यू और वैश्विक प्रभाव से तय होती है—और इस पैमाने पर रियल एस्टेट सबसे ऊपर, उसके बाद कच्चा तेल और फिर सोना आता है।
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