April 30, 2026

लखनऊ: एसडीआरएफ मुख्यालय में अमरूद तोड़कर खाने पर सिपाही को नोटिस, जवाब सामने आने के बाद मचा हड़कंप

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित स्टेट डिजास्टर रिलीफ फोर्स (एसडीआरएफ) मुख्यालय से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों से लेकर सोशल मीडिया तक सभी को हैरान कर दिया है। यहां कमांड हाउस परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से एक अमरूद तोड़कर खाने पर ड्यूटी पर तैनात सिपाही को अधिकारियों की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया। यह मामला अब विभागीय चर्चा के साथ-साथ सार्वजनिक बहस का विषय भी बन गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला एसडीआरएफ मुख्यालय, लखनऊ में तैनात एक गार्ड से जुड़ा है, जिसकी ड्यूटी 4 जनवरी से 7 जनवरी के बीच कमांड हाउस गार्ड के रूप में लगी थी। इसी दौरान परिसर में लगे अमरूद के पेड़ से एक फल तोड़े जाने की जानकारी अधिकारियों के संज्ञान में आई। अधिकारियों ने इसे सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता मानते हुए संबंधित सिपाही को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा।

नोटिस में सिपाही पर आरोप लगाया गया कि उसने बिना अनुमति सरकारी परिसर में लगे पेड़ से फल तोड़ा। साथ ही यह भी कहा गया कि इस घटना की न तो उसने जानकारी दी और न ही इसे रोकने का प्रयास किया, जो कि कार्य में लापरवाही, कर्तव्य के प्रति शिथिलता और स्वेच्छाचारिता की श्रेणी में आता है। नोटिस में यह स्पष्ट किया गया कि यदि संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया तो विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।

इस नोटिस के जवाब में सिपाही ने जो स्पष्टीकरण दिया, वह अब चर्चा का केंद्र बन गया है। सिपाही ने अपने लिखित जवाब में बताया कि 5 जनवरी की रात विशेष भोजन में परोसे गए पनीर की गुणवत्ता ठीक नहीं थी, जिसके कारण उसका पेट खराब हो गया। पेट दर्द से परेशान होकर उसने इंटरनेट पर उपाय तलाशे, जहां उसे जानकारी मिली कि अमरूद खाने से पेट दर्द में राहत मिल सकती है। छुट्टी बंद होने और डॉक्टर तक पहुंच न होने की वजह से उसने मजबूरी में अमरूद तोड़कर खा लिया।

अपने जवाब में सिपाही ने यह भी कहा कि यह उसकी पहली गलती है और उसने किसी नियम को तोड़ने के इरादे से ऐसा नहीं किया। उसने अधिकारियों से इस घटना के लिए माफी मांगते हुए भविष्य में इस तरह की गलती दोबारा न होने का भरोसा भी दिलाया है। सिपाही का यह जवाब सामने आने के बाद विभाग के भीतर इस पूरे मामले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं। कुछ लोग इसे जरूरत से ज्यादा सख्ती बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए नियमों का पालन जरूरी है, चाहे मामला कितना भी छोटा क्यों न हो। फिलहाल, सिपाही के जवाब पर विभागीय अधिकारियों का निर्णय आना बाकी है और यह देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है।

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