उत्तर प्रदेश बीजेपी को मिलेगा नया अध्यक्ष: नामांकन से वोटिंग तक पूरी प्रक्रिया, पंकज चौधरी सबसे मजबूत दावेदार
उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी को रविवार, 14 दिसंबर को नया प्रदेश अध्यक्ष मिलने जा रहा है। इसी को लेकर प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। शनिवार से अध्यक्ष पद के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और लखनऊ राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गया है। पार्टी संगठन ने चुनाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं और उसी दिन अध्यक्ष पद के चुनाव के साथ नए नाम की औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम को 2027 विधानसभा चुनाव और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी बेहद अहम माना जा रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए कुल 464 मतदाता लखनऊ में मौजूद रहेंगे। इनमें 5 लोकसभा सांसद, 8 विधान परिषद सदस्य, 26 विधायक और 425 जिला अध्यक्ष व प्रांतीय परिषद के सदस्य शामिल हैं। ये सभी मतदाता प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। जिन पांच सांसदों को वोटिंग का अधिकार दिया गया है, उनमें डॉ. महेश शर्मा, एस. पी. सिंह बघेल, कमलेश पासवान, देवेंद्र सिंह भोले और विनोद कुमार बिंद शामिल हैं। पार्टी के अंदर यह संदेश साफ है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह संगठनात्मक ढांचे के अनुसार होगी और किसी तरह का असंतुलन नहीं दिखाया जाएगा।
अध्यक्ष पद की दौड़ में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री और महाराजगंज से सात बार सांसद रह चुके पंकज चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। माना जा रहा है कि इस बार बीजेपी उत्तर प्रदेश में ओबीसी वर्ग से ही प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी और खासतौर पर कुर्मी जाति को प्राथमिकता दी जा रही है। पंकज चौधरी शनिवार सुबह दिल्ली से लखनऊ के लिए रवाना हो चुके हैं और नामांकन प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनके साथ बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव और उत्तर प्रदेश के चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े भी एक ही फ्लाइट से लखनऊ पहुंचे, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।
लखनऊ पहुंचने के बाद पंकज चौधरी सीधे वीवीआईपी गेस्ट हाउस गए और वहां से बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे, जहां वे नामांकन प्रक्रिया में शामिल हुए। जानकारी के मुताबिक नामांकन दोपहर 2 से 3 बजे के बीच किया गया। इससे पहले शुक्रवार रात उन्होंने उत्तर प्रदेश के पूर्व बीजेपी अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी से मुलाकात की थी। इसके बाद गोरखपुर क्षेत्र के बांसगांव से सांसद और केंद्रीय राज्यमंत्री कमलेश पासवान के आवास पर डिनर मीटिंग भी हुई। सूत्रों का दावा है कि पार्टी के संगठन मंत्री बीएल संतोष ने पहले ही पंकज चौधरी से प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने का आग्रह किया था।
बीजेपी के भीतर ओबीसी चेहरे को आगे बढ़ाने के पीछे ठोस राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं। पार्टी के आंतरिक आकलन के अनुसार, 2019 के मुकाबले 2024 में ओबीसी वोट प्रतिशत में गिरावट दर्ज की गई है। कुर्मी और कोइरी समुदाय का समर्थन 80 प्रतिशत से घटकर लगभग 61 प्रतिशत रह गया, जबकि अन्य ओबीसी वर्गों में भी समर्थन में कमी आई। वहीं समाजवादी पार्टी का पीडीए फॉर्मूला बीजेपी के लिए चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में पार्टी पिछड़े वर्गों को फिर से साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ शक्ति संतुलन के रूप में भी देखा जा रहा है। दोनों नेता गोरखपुर क्षेत्र से आते हैं और क्षेत्रीय राजनीति में लंबे समय से उनकी प्रतिस्पर्धा रही है। पंकज चौधरी को केंद्रीय नेतृत्व के भरोसेमंद प्रतिनिधि के तौर पर देखा जाता है, जिससे यह संकेत भी मिलता है कि बीजेपी संगठन और सरकार के बीच संतुलन साधने की दिशा में आगे बढ़ रही है। अब सबकी निगाहें 14 दिसंबर पर टिकी हैं, जब उत्तर प्रदेश बीजेपी को उसका नया अध्यक्ष औपचारिक रूप से मिल जाएगा।
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