May 1, 2026

अमेरिका: नौकरी या H-1B वीजा चाहिए तो सोशल मीडिया प्रोफाइल साफ-सुथरा रखना जरूरी

नई सोशल मीडिया स्क्रीनिंग के कारण H-1B इंटरव्यू अगले साल तक टले, दूतावास ने दी कड़ी एडवाइजरी

अमेरिका में नौकरी करने का सपना रखने वाले भारतीयों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। भारत में अमेरिकी दूतावास ने घोषणा की है कि अब H-1B, H-4 और अन्य वीजा कैटेगरी के लिए सोशल मीडिया जांच अनिवार्य कर दी गई है। यानी फेसबुक, इंस्टाग्राम और X पर किए गए पुराने पोस्ट, लाइक, शेयर से लेकर आपकी टिप्पणियों तक—हर चीज की स्क्रीनिंग होगी। यदि किसी भी प्रकार की संदिग्ध, हिंसक, भड़काऊ या अमेरिका-विरोधी सामग्री मिलती है, तो वीजा आवेदन तुरंत खारिज किया जा सकता है।

इस नई प्रक्रिया का सीधा असर H-1B वीजा इंटरव्यू शेड्यूल पर पड़ा है। अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट ने 15 दिसंबर से तय कई इंटरव्यू की तारीखें बदल दी हैं और कई मामलों में इंटरव्यू मार्च 2026 तक टाल दिए गए हैं। इसका मतलब है कि वीजा स्टैम्पिंग के लिए भारत लौटे कई H-1B वीजा धारकों को अमेरिका वापस जाने में भी महीनों की देरी हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक सोशल मीडिया स्क्रीनिंग में समय अधिक लग रहा है, इसलिए पूरी प्रक्रिया धीमी हो गई है।

अमेरिकी दूतावास ने X पर पोस्ट करते हुए साफ कहा है कि जिन आवेदकों को नई इंटरव्यू तारीख भेजी गई है, वे सिर्फ उसी नई तारीख पर ही दूतावास आएं। पुराने समय पर पहुंचने वालों को एंट्री नहीं दी जाएगी। दूतावास के अनुसार कई लोग भ्रम के कारण पुरानी तारीख पर पहुंच रहे थे, इसलिए यह एडवाइजरी जारी करना जरूरी हो गया।

नए नियमों के तहत H-1B और H-4 के अलावा F (स्टूडेंट वीज़ा), M और J (एक्सचेंज वीज़ा) श्रेणी पर भी सोशल मीडिया जांच लागू होगी। सरकार ने यह भी कहा है कि सभी आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक मोड पर रखने होंगे, ताकि अधिकारियों को उनकी ऑनलाइन गतिविधियों, व्यवहार और संभावित जोखिम का आकलन करने में आसानी हो सके। यह कदम अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सख्त उपायों का हिस्सा है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि हर वीजा निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है, इसलिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कोई भी आवेदक देश के लिए खतरा न बने। इसी नीति के तहत अमेरिका पहले ही H-1B वीजा फीस को 1 लाख डॉलर तक बढ़ा चुका है और अब डिजिटल footprint की जांच को भी अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के चलते भारतीय समेत दुनिया भर के आवेदकों को अब अधिक कागजी कार्यवाही, ज्यादा जांच और लंबे इंतजार का सामना करना पड़ेगा।

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