June 1, 2026

बिहार में मां के दूध में यूरेनियम मिलने से हड़कंप, वैज्ञानिक बोले- खतरा कम लेकिन सतर्क रहना जरूरी

बिहार में हुए एक हेल्थ रिसर्च ने चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में की गई एक स्टडी में कुछ जिलों की महिलाओं के ब्रेस्टमिल्क में यूरेनियम (U-238) मिलने की पुष्टि हुई है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या अब स्तनपान बच्चों के लिए खतरा बन रहा है? हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि स्तर बेहद कम है, इसलिए स्तनपान अभी भी सबसे सुरक्षित और जरूरी पोषण है।

यह अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच कराया गया था, जिसमें बिहार के भोजपुर, कटिहार, नालंदा, बेगूसराय और खगड़िया जिलों की 40 माताओं के दूध के सैंपल लिए गए। सभी सैंपलों में यूरेनियम की थोड़ी मात्रा मिली, लेकिन सबसे ज्यादा स्तर कटिहार में और औसत स्तर खगड़िया में पाया गया। रिपोर्ट के सामने आते ही राज्य में हेल्थ और वॉटर क्वालिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

स्टडी करने वाली टीम के मुताबिक सैंपल्स का विश्लेषण AIIMS दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री विभाग और NIPER (हाजीपुर) की लैब में किया गया। विशेषज्ञों की मानें तो दूध में पाया गया स्तर 0 से 5.25 माइक्रोग्राम/लीटर के बीच है, जबकि WHO की लिमिट 30 माइक्रोग्राम/लीटर है। यानी अभी यह मात्रा मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाली सीमा से काफी कम है।

AIIMS दिल्ली के बायोकेमिस्ट्री प्रोफेसर डॉ. अशोक शर्मा ने बताया कि अगर लंबे समय तक अधिक मात्रा में यूरेनियम शरीर में जाए तो बच्चे की याददाश्त, आईक्यू, किडनी और शारीरिक विकास पर असर पड़ सकता है। गंभीर मामलों में इससे कैंसर तक का खतरा हो सकता है। लेकिन वर्तमान रिपोर्ट में स्तर इतना कम है कि इससे कोई गंभीर नुकसान होने की संभावना नहीं है।

यूरेनियम मिट्टी, चट्टानों और जल स्रोतों में मौजूद एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी धातु है। माना जा रहा है कि कुछ क्षेत्रों के भूजल में पहले से मौजूद यूरेनियम ही दूध तक पहुंचा है। इसी कारण, जल गुणवत्ता को लेकर सरकार पहले से हाई अलर्ट पर है और जल जीवन मिशन के तहत सुरक्षित पानी उपलब्ध कराने पर काम जारी है।

रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि ऐसे क्षेत्रों में जहां पानी में रेडियोधर्मी तत्व पाए जाते हैं, लोगों को ग्राउंडवॉटर पीना बंद कर सरकारी साफ जल आपूर्ति अपनानी चाहिए। साथ ही, समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराते रहना भी जरूरी है।

वैज्ञानिकों ने साफ कहा है — “घबराने की जरूरत नहीं है। मां का दूध अब भी बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित, जरूरी और बेहतर पोषण है।”

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