कतर: मुस्लिम देश में तेजी से गिर रही शादी की दर, सरकार दे रही 2 लाख से ज्यादा का शादी भत्ता—फिर भी नहीं बढ़ रही विवाह की संख्या
युवाओं के शादी से दूर होने पर बढ़ी चिंता, कतर सरकार ने वित्तीय प्रोत्साहन से लेकर मेटरनिटी लीव तक किए बड़े बदलाव
मुस्लिम देश कतर इन दिनों एक गंभीर सामाजिक चुनौती का सामना कर रहा है—शादी की घटती दर। दुनिया भर में जहां विवाह समारोहों का सीजन चल रहा है, वहीं कतर में युवा शादी से लगातार दूरी बना रहे हैं। 2018 में तो कतर का मैरिज रेट दुनिया में सबसे कम था, जहां प्रति 1,000 आबादी पर सिर्फ 1.4 शादियां हुईं। कई वर्षों से गिरते आंकड़ों को देखते हुए अब कतर सरकार ने बड़े स्तर पर सुधार और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की हैं, ताकि युवा विवाह करने के लिए प्रेरित हों।
कतर के PSA (Planning & Statistics Authority) की रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में विवाह दर में और गिरावट देखी गई। 15 वर्ष और उससे अधिक उम्र की कतरी आबादी में पुरुषों की विवाह दर 19.7 और महिलाओं की 17.1 प्रति 1,000 रही। यह आंकड़ा 2006 से लगातार कम होता जा रहा है। 2010 में पुरुषों की विवाह दर 24.3 और महिलाओं की 23.5 थी, लेकिन समय के साथ यह आंकड़ा लगातार नीचे गिरते हुए आज चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है। तलाक दर भी स्थिर नहीं है, जिससे परिवार व्यवस्था पर दबाव और बढ़ गया है।
विवाह दर गिरने के पीछे कई प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। दोहा न्यूज और MDSP की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ा कारण कतरी महिलाओं में शिक्षा के बढ़ते स्तर को माना जा रहा है। उच्च शिक्षा और करियर पर बढ़ते फोकस के कारण महिलाएं देर से शादी कर रही हैं, जिससे विवाह की संख्या घट रही है। इसके अलावा, कतर में होने वाली हाई-प्रोफाइल और महंगी शादियां भी युवाओं के लिए एक बड़ी समस्या बन रही हैं। शादी का खर्च इतना अधिक है कि युवा विवाह करने से कतराते हैं और इसे टालते रहते हैं।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कतरी महिलाएं अब पहला बच्चा देर से जन्म दे रही हैं और कुल जन्म दर भी घट रही है। यह सामाजिक बदलाव भी शादी की घटती दर से जुड़ा हुआ है। सरकार को डर है कि यदि यह स्थिति जारी रही, तो आने वाले वर्ष में जनसंख्या संरचना और सामाजिक संतुलन पर गंभीर असर हो सकता है।
इसी संकट से निपटने के लिए कतर सरकार ने अक्टूबर 2025 में अपने सिविल ह्यूमन रिसोर्सेज कानून में बड़े बदलाव किए। नए कानून नंबर 25 के तहत शादीशुदा कतरी कपल को वित्तीय सहायता देने का प्रावधान किया गया है। हर पति-पत्नी को 12,000 कतरी रियाल यानी लगभग 2,92,300 रुपये का सालाना मैरिज इंसेंटिव दिया जाएगा। यह राशि दोनों जीवनसाथियों को अलग-अलग मिलेगी, चाहे वे दोनों सरकारी नौकरी में ही क्यों न हों। सरकार का उद्देश्य युवाओं को शादी करने और परिवार बढ़ाने के लिए प्रेरित करना है।
इसके अलावा मातृत्व अवकाश को भी बढ़ाया गया है। अब महिलाओं को पूरे वेतन के साथ तीन महीने की मेटरनिटी लीव मिलेगी, जबकि जुड़वां या दिव्यांग बच्चे के जन्म पर यह अवकाश छह महीने तक होगा। गर्भावस्था के अंतिम चरण में घर से काम करने की सुविधा भी दी गई है। अलग रहने वाली पत्नियों के लिए हाउसिंग भत्ता भी बढ़ाया गया है, ताकि विवाह के बाद आर्थिक दबाव कम किया जा सके।
कतर सरकार के इन प्रयासों के बाद भी विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में बढ़ते करियर-ओरिएंटेड माइंडसेट और शादी के अधिक खर्च जैसी समस्याओं को दूर किए बिना मैरिज रेट बढ़ाना आसान नहीं होगा। सरकार की नई नीतियां प्रभावी होंगी या नहीं, यह आने वाले वर्षों में आंकड़ों से साफ होगा।
Share this content:
