May 1, 2026

बिहार में महागठबंधन पर संकट गहराया: JMM ने दिया 15 अक्टूबर तक अल्टीमेटम, कहा– सम्मान नहीं मिला तो अकेले लड़ेंगे चुनाव

बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर महागठबंधन में सीट बंटवारे पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अब गठबंधन के भीतर तकरार को खुलकर सामने ला दिया है। पार्टी ने 15 अक्टूबर तक सीट बंटवारे पर स्थिति स्पष्ट करने का अल्टीमेटम दिया है। JMM बिहार में 12 सीटों की मांग कर रहा है और चेतावनी दी है कि अगर उसे सम्मानजनक हिस्सेदारी नहीं दी गई, तो वह अकेले मैदान में उतरेगा।

JMM के केंद्रीय महासचिव सुप्रिया भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी के उम्मीदवार नामांकन के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि बिहार में भी महागठबंधन को वही गठबंधन धर्म निभाना चाहिए जो झारखंड में निभाया गया था। भट्टाचार्य ने कहा कि “हमने हमेशा गठबंधन की मर्यादा रखी, लेकिन अगर हमें नजरअंदाज किया गया तो हम स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने को मजबूर होंगे।”

भट्टाचार्य ने राजद (RJD) को याद दिलाते हुए कहा कि 2019 और 2024 में झारखंड में उन्हें सम्मानजनक सीटें और सत्ता में भागीदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि “2019 में राजद को 7 सीटें दी गई थीं, जिनमें से एक प्रत्याशी ही जीत सका था, फिर भी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने उन्हें 5 साल तक मंत्रिमंडल में स्थान दिया। इसी तरह 2024 में भी उन्हें 6 सीटें दी गईं और चार प्रत्याशी विजयी हुए।” JMM का कहना है कि बिहार में भी वही सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद की जा रही है।

इस बीच, झारखंड मुक्ति मोर्चा ने 7 अक्टूबर को पटना में तेजस्वी यादव के आवास पर हुई बैठक का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी 12 सीटों की दावेदारी पहले ही रखी जा चुकी है। बैठक में झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू और JMM नेता विनोद पांडेय भी शामिल हुए थे। हालांकि, बैठक के बाद भी सीटों पर सहमति नहीं बन पाई, जिससे महागठबंधन के भीतर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

JMM ने चेतावनी दी है कि वह किसी के रहम पर नहीं टिका है। भट्टाचार्य ने कहा, “हमारे पास मजबूत उम्मीदवार हैं, हमें फॉर्म ए और बी भरना भी आता है, चुनाव जीतना भी। अगर हमें सम्मान नहीं मिला तो हम बिहार में भी बीजेपी के खिलाफ मजबूती से अकेले लड़ेंगे।” पार्टी ने साफ किया है कि वे गठबंधन में दरार नहीं चाहते, लेकिन 15 अक्टूबर तक स्पष्ट जवाब न मिलने पर वे अपना रास्ता खुद तय करेंगे। इससे महागठबंधन के भीतर एक और राजनीतिक संकट गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

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