May 1, 2026

चंडीगढ़: IPS वाई पूरन कुमार ने सुसाइड से पहले लिखी वसीयत और 3900 शब्दों का सुसाइड नोट

पूरी संपत्ति पत्नी अमनीत कुमार के नाम की, सुसाइड नोट में जताई मानसिक उत्पीड़न की कहानी

चंडीगढ़ में हरियाणा के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) वाई. पूरन कुमार ने हाल ही में अपने सेक्टर-11 स्थित आवास में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को उनके घर से 9 पन्नों का सुसाइड नोट और 3900 शब्दों की आपबीती मिली। इस नोट में पूरन कुमार ने अपनी सारी चल और अचल संपत्ति अपनी पत्नी अमनीत कुमार के नाम करने की घोषणा की। अमनीत कुमार खुद IAS अधिकारी हैं।

सुसाइड नोट में पूरन कुमार ने बताया कि उन्हें हरियाणा के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा 2020 से मानसिक उत्पीड़न, जाति-आधारित भेदभाव और सार्वजनिक अपमान का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने लिखा कि उनकी कई शिकायतें और अनुरोध जैसे वाहन आवंटन, आधिकारिक आवास, अर्जित अवकाश और नियमों का पालन करवाने की मांगें अनसुनी कर दी गईं और उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कदम उठाए गए।

पूरन कुमार ने 15 IAS और IPS अधिकारियों के नाम सार्वजनिक रूप से लिए और उनके खिलाफ भेदभाव, अपमान और उत्पीड़न जैसे आरोप लगाए। उन्होंने उल्लेख किया कि उनके बैचमेट मनोज यादव, पी.के. अग्रवाल और टी.वी.एस.एन. प्रसाद ने मिलकर उनका मानसिक उत्पीड़न किया और इस संबंध में तत्कालीन गृह मंत्री और वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी को शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सुसाइड नोट में उन्होंने अपने अंतिम कदम का कारण बताते हुए IPS कुलविंदर सिंह और IPS माटा रवि किरण द्वारा दी गई धमकी और आपत्तिजनक भाषा का जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि डीजीपी कार्यालय द्वारा एक पुलिस अधिकारी को स्थायी रूप से हटाने के आदेश के बाद उन्हें ‘सावधान रहने’ की चेतावनी भी दी गई थी, जो उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा गया।

पूरन कुमार ने अपनी संपत्ति में HDFC बैंक में वेतन खाते की राशि, डीमैट खाते में शेयर, चंडीगढ़ और मोहाली में प्लॉट और यूनिवर्सल बिजनेस पार्क, गुरुग्राम में ऑफिस स्पेस शामिल कर सभी को पत्नी अमनीत कुमार के नाम कर दिया। उन्होंने यह घोषणा अपनी पूर्ण चेतना और स्वतंत्र इच्छा से की और इसे अंतिम वसीयत के रूप में दर्ज किया।

पूरे देश में इस सुसाइड केस ने सनसनी फैला दी है। पुलिस और प्रशासन अब मामले की गहन जांच कर रहे हैं, जबकि समाज में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न और भेदभाव जैसे मुद्दों पर बहस शुरू हो गई है। इस घटना ने अधिकारियों के अधिकार और मानसिक सुरक्षा की गंभीर आवश्यकता को भी उजागर किया है।

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