अमेरिका में एच-1बी वीजा शुल्क पर बवाल, ट्रंप सरकार के खिलाफ अदालत पहुंचा मामला
अमेरिका में एच-1बी वीजा के लिए 1,00,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) शुल्क लगाने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया है। इस निर्णय को चुनौती देते हुए स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं, धार्मिक समूहों, विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों और अन्य पेशेवरों के एक समूह ने संघीय अदालत में मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने इस शुल्क को “अनुचित और नुकसानदायक” बताते हुए इसे तत्काल हटाने की मांग की है।
मुकदमे में कहा गया है कि एच-1बी वीजा कार्यक्रम अमेरिका के शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बेहद अहम है। इसके माध्यम से विदेशी विशेषज्ञ, डॉक्टर, प्रोफेसर और अन्य कुशल कर्मियों की भर्ती होती है, जो देश की सेवा व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद करते हैं। ट्रंप प्रशासन के इस फैसले से नियोक्ताओं, श्रमिकों और संघीय एजेंसियों के बीच अराजकता और असंतुलन पैदा होने की आशंका जताई गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अगर अदालत ने इस शुल्क पर रोक नहीं लगाई, तो इससे अस्पतालों में डॉक्टरों और नर्सों की कमी, चर्चों में पादरियों की किल्लत और स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी देखी जा सकती है। ‘डेमोक्रेसी फॉरवर्ड फाउंडेशन’ और ‘जस्टिस एक्शन सेंटर’ जैसे संगठनों ने चेतावनी दी है कि यह नीति अमेरिका में नवाचार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक असर डाल सकती है।
यह मुकदमा सैन फ्रांसिस्को की संघीय अदालत में दायर किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मांग की है कि इस शुल्क पर तुरंत अंतरिम रोक लगाई जाए, ताकि आवश्यक कर्मियों की भर्ती पर कोई असर न पड़े। कई विशेषज्ञों ने भी कहा है कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों और अर्थव्यवस्था के लिए दीर्घकालिक नुकसानदायक साबित हो सकता है।
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