GST रेट कट का रियलिटी चेक: क्या वाकई सस्ता हुआ सामान या सिर्फ दिखावा?
सरकार ने हाल ही में टीवी, एसी, कार से लेकर रोजमर्रा की चीजों पर GST घटाया है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या इसका फायदा वाकई आम खरीदार की जेब तक पहुंच रहा है या फिर यह राहत सिर्फ कागजों तक सीमित है।
सरकार ने 22 सितंबर से GST रेट कट (GST 2.0) लागू कर दिया है। नए ढांचे में टैक्स स्लैब को तीन श्रेणियों – 5%, 18% और 40% – में सीमित कर दिया गया है। इसका मकसद टैक्स सिस्टम को सरल बनाना और लोगों को राहत देना है। बड़ी वस्तुओं जैसे टीवी, एयर कंडीशनर और कारें अब पहले से कुछ सस्ती हो गई हैं। वहीं रोजमर्रा की जरूरी चीजों जैसे दूध और दवाओं पर टैक्स घटने से आम उपभोक्ताओं को सीधी राहत मिलने की उम्मीद जताई गई है। लेकिन जमीनी हकीकत क्या कहती है?
क्या वाकई में सस्ते हुए दाम?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, टैक्स कटौती के बाद छोटी कारें 40,000 से 75,000 रुपये तक सस्ती हो गई हैं। वहीं दोपहिया वाहन अब 7,000 से 18,800 रुपये तक कम कीमत पर मिल रहे हैं। एसी और टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स पर भी कीमतों में कमी की घोषणा की गई है। सुनने में यह राहत बड़ी लगती है, लेकिन बाजार में इसकी असली तस्वीर थोड़ी अलग है।
दुकानदारों की चाल: बढ़ी हुई MRP
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां और रिटेलर GST कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाते। अक्सर उत्पाद की MRP पहले बढ़ा दी जाती है और फिर छूट का दिखावा किया जाता है। उदाहरण के लिए, एक एसी की वास्तविक कीमत में भले ही टैक्स कटौती से 5,000 रुपये की राहत आई हो, लेकिन कंपनी ने MRP 7,000 रुपये बढ़ाकर ग्राहक को केवल आंशिक फायदा दिया। इससे दुकानदार को डिस्काउंट का प्रचार करने में आसानी होती है, लेकिन ग्राहक की बचत सीमित रह जाती है।
पिछली बार भी रह गया था फायदा अधूरा
ET की एक पुरानी रिपोर्ट बताती है कि 2018-19 में GST कटौती के समय केवल 20% खरीदारों को ही वास्तविक बचत का लाभ मिला था। बाकी लोगों ने पाया कि कंपनियों और दुकानदारों ने टैक्स में मिली राहत को अपनी जेब में रख लिया। इस बार भी स्थिति कुछ हद तक वैसी ही दिखाई दे रही है।
त्योहारी सीजन में सोच-समझकर करें खर्च
चूंकि कटौती त्योहारों से पहले लागू हुई है, इसलिए ग्राहक बड़े पैमाने पर खरीदारी करने के लिए उत्साहित हैं। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि केवल छूट देखकर क्रेडिट कार्ड या EMI पर ज्यादा निर्भर न हों। आय में बढ़ोतरी के बिना अधिक खर्च करना आगे चलकर बोझ बन सकता है। बेहतर होगा कि ग्राहक कीमतों की तुलना करें, असली डिस्काउंट पहचानें और जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करें।
नतीजा: फायदा है लेकिन पूरी तरह नहीं
GST कटौती से सामान की कीमतों में गिरावट आई है, यह सच है। लेकिन बाजार की चालाकियों के बीच आम ग्राहक को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पाता। असली राहत पाने के लिए उपभोक्ताओं को सजग रहना होगा। सही प्रोडक्ट, सही जगह और सही कीमत पर खरीदारी ही त्योहारों की खुशी को कर्ज के बोझ से बचा सकती है।
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