फोन बंद, सड़कें सूनी और 3 हजार सैनिकों की तैनाती: पाकिस्तान के पीओके में क्यों भड़का बवाल?
स्थानीय नागरिक बनाम सरकार की जंग, अनिश्चितकालीन हड़ताल से ठप हुआ जनजीवन, आंदोलनकारियों की 38 मांगों ने बढ़ाया संकट
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) इस समय भीषण उथल-पुथल से गुजर रहा है। स्थानीय पब्लिक एक्शन कमेटी द्वारा 29 सितंबर से घोषित की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल ने पूरे क्षेत्र को ठप कर दिया है। सुबह से ही सड़कें सुनसान पड़ी हैं, मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद है और स्कूल-कॉलेजों के ताले जड़ दिए गए हैं। हालात इतने बिगड़े कि पाकिस्तान सरकार को इस्लामाबाद से तीन हजार सैनिकों की तैनाती करनी पड़ी, जिनका सीधा काम आंदोलनकारियों पर एक्शन लेना है।
आंदोलन की जड़ – आटे से शुरू होकर भ्रष्टाचार तक
इस बवाल की शुरुआत महज आटे की कीमतों में बढ़ोतरी से हुई थी। लेकिन धीरे-धीरे यह मुद्दा सिर्फ महंगाई तक सीमित न रहकर भ्रष्टाचार, रोजगार और शासन प्रणाली के खिलाफ बड़े विद्रोह में बदल गया। स्थानीय नागरिकों ने सरकार के सामने 38 मांगों की लंबी सूची रखी है। इन मांगों में प्रवासियों के लिए आरक्षित विधानसभा की 12 सीटों को समाप्त करने, पीओके के प्रमुख नेताओं के भत्ते खत्म करने और वीआईपी कल्चर को पूरी तरह से बंद करने की मांग शामिल है। साथ ही जल विद्युत परियोजनाओं से मिलने वाली रॉयल्टी को स्थानीय जनता तक पहुंचाने की भी मांग की जा रही है।
पब्लिक एक्शन कमेटी और शौकत अली मीर की भूमिका
बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 सितंबर को पब्लिक एक्शन कमेटी और सरकार के बीच एक बैठक हुई थी। इस दौरान कमेटी ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी थी कि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे शौकत अली मीर लगातार भ्रष्टाचार, रोजगार की कमी और सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पाकिस्तान सरकार ने पीओके के लोगों को दलदल में धकेल दिया है और अब इससे बाहर निकलने का वक्त आ गया है।
स्थानीय सुरक्षाबलों का विद्रोह और नई चुनौती
पीओके में पहले से तैनात स्थानीय सुरक्षा बल भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उनकी मांग समान वेतन और भत्ते की है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया गया है। यही वजह है कि पाकिस्तान को इस्लामाबाद से 3 हजार जवान मुजफ्फराबाद भेजने पड़े। इन जवानों की तैनाती के बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कदम आंदोलन को दबाने की साजिश है, जबकि इससे लोगों का गुस्सा और भड़क सकता है।
जनजीवन पूरी तरह ठप
अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। पीओके में दुकानें बंद हैं, परिवहन ठप है और आम जनता घरों में कैद होने को मजबूर है। सड़कों पर सिर्फ फोर्स की गाड़ियां दिखाई दे रही हैं। जनता और सरकार के बीच टकराव लगातार बढ़ रहा है और हालात किसी बड़े टकराव की ओर इशारा कर रहे हैं। आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं और सरकार झुकने को राजी नहीं। नतीजा यह है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर इस समय अपने सबसे बड़े राजनीतिक और सामाजिक संकट के दौर से गुजर रहा है।
Share this content:
