कुंडा विधायक राजा भैया के पारिवारिक झगड़े में बेटी राघवी का तीखा आरोप — “हमें मरवा दीजिए या फर्जी मुकदमों से प्रताड़ना बंद कीजिए”
कुंडा विधानसभा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के परिवार में चल रहे विवाद ने हाल ही में नया रंग ले लिया है। उनकी बड़ी बेटी राघवी कुमारी ने सार्वजनिक रूप से पिता और प्रयोजक प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और खुलकर कहा है कि वे, उनकी मां भानवी सिंह और बहन लगातार उत्पीड़न और फर्जी मुकदमों का शिकार हैं। राघवी ने सीएम से इतनी तीखी शिकायत की कि उन्होंने कहा या तो उन्हें एक ही बार में मार दिया जाए या फिर फर्जी मुकदमों के जरिए धीरे-धीरे प्रताड़ना बंद की जाए — यह शब्द सीधे-सीधे परिवार की गहरी खाई और डर की तस्वीर पेश करते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि कुछ इस तरह है कि पारिवारिक संपत्ति और वर्चस्व को लेकर वर्षों से तनाव चला आ रहा है। पक्ष-विपक्ष के पोस्ट और वीडियो सोशल मीडिया पर लगातार वायरल हो रहे हैं। राजा भैया के बेटे शिवराज प्रताप ने भी सोशल मीडिया पर अपनी मां के बचाव में वीडियो और लंबा पोस्ट शेयर कर आरोपों का पलटवार किया है और अपनी मां पर लगे कथित गंभीर आरोपों की ओर इशारा किया है। परिवार के अंदरूनी मसलों ने सार्वजनिक रूप ले लिया है और अब राजनीतिक दबाव तथा पुलिस-प्रशासनिक हस्तक्षेप भी चर्चा का हिस्सा बन गए हैं।
राघवी ने अपने बयानों में पुलिस और प्रशासन पर भी सवाल उठाए हैं — उनका कहना है कि जब दिल्ली पुलिस कार्रवाई के लिए लखनऊ गयी थी तब स्थानीय गवाहों को डराकर चुप कराया गया, और सुरक्षा के नाम पर तैनात गनर गवाहों को दबाने में शामिल रहा। राघवी यह भी दावा करती हैं कि उन पर जानलेवा धमकियाँ मिली हैं और उनकी मां की जान को खतरा महसूस हो रहा है; इसके बावजूद कार्रवाई कम और प्रताड़ना अधिक नजर आ रही है। इस तरह के आरोप प्रशासन की जवाबदेही और त्वरित जांच की मांग को और तेज कर रहे हैं।
कानूनी मोर्चे पर भी मामला उलझा हुआ है — पक्षकार एक-दूसरे पर फर्जी मुकदमों का आरोप लगा रहे हैं और कोर्ट में आपसी लड़ाई जारी है। परिवार के अंदर संपत्ति के बंटवारे और दहेज से जुड़ी दलीलें भी उजागर हुई हैं; एक पक्ष ने दूसरे को दहेज लोभी बताने जैसे आरोप कोर्ट में दिये हैं, तो दूसरी ओर शारीरिक हमले और उत्पीड़न के भी दावे मौजूद हैं। अदालतों और पुलिस के सामने दाखिल दस्तावेज़ और रिकॉर्ड इस विवाद की वैधानिक जटिलताओं को दर्शाते हैं।
यह मामला अब सामाजिक और राजनैतिक बहस का विषय बन चुका है — स्थानीय लोग, सोशल मीडिया और राजनीतिक दायरे इसमें सक्रिय हैं। परिवार के सदस्यों के बयान, साझा किए गए वीडियो और आरोप-प्रत्यारोप ने मामले को सार्वजनिक हित का मसला बना दिया है। न्यायिक प्रक्रियाओं, स्वतंत्र जांच और घटनास्थल पर सच्चाई की पड़ताल की आवश्यकता इस विवाद में विशेष रूप से बढ़ गयी है ताकि सुरक्षा की गारंटी मिल सके और अनुचित दबाव या न्यायिक हस्तक्षेप की आशंका दूर हो सके।
अभी के लिए स्थिति ऐसी है कि परिवार के बीच गहरा फूट बना हुआ है, कई मुकदमे चल रहे हैं और दोनों पक्ष अपने-अपने समर्थन में सबूत और बयान पेश कर रहे हैं। आगे क्या कार्रवाई होगी — प्रशासन किस तरह से सुरक्षा व निष्पक्ष जांच की व्यवस्था करता है और अदालतों में दर्ज प्रमाण किस निष्कर्ष पर पहुंचते हैं — यह आगे आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
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