April 30, 2026

कानपुर, उत्तर प्रदेश: करोड़पति कानूनगो आलोक दुबे, 41 संपत्तियों में गड़बड़ी के बाद डिमोशन

एक गलती और 41 संपत्तियों का मामला, कानूनगो को डिमोशन कर लेखपाल बनाया गया, FIR भी दर्ज

कानपुर में तहसील प्रशासन का एक कानूनगो करोड़पति निकला। आलोक दुबे नाम के इस कानूनगो के पास कुल 41 संपत्तियों का रिकॉर्ड मिला, लेकिन एक गलती ने उसे बड़े संकट में डाल दिया। डीएम के आदेश पर उसे कानूनगो से डिमोशन कर लेखपाल बना दिया गया है। इतना ही नहीं, उसके खिलाफ थाना कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज की गई है और चार्जशीट आने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, संदीप सिंह नामक व्यक्ति की शिकायत पर गठित जांच समिति में एडीएम (न्यायिक), एसडीएम सदर और एसीपी कोतवाली शामिल थे। जांच में पता चला कि सिंहपुर कठार की गाटा संख्या 207 और रामपुर भीमसेन की गाटा संख्या 895 की जमीनें न्यायालय में विचाराधीन थीं। दुबे ने इन संपत्तियों के बैनामा और बिक्री में नियमों का उल्लंघन किया। विक्रेता का नाम खतौनी में नहीं था और बिक्री की वैधानिक अनुमति भी नहीं ली गई थी। इसके बावजूद 11 मार्च 2024 को वरासत दर्ज कर उसी दिन बैनामा किया गया और 19 अक्टूबर 2024 को RNG इंफ्रा नाम की निजी कंपनी को संपत्ति बेच दी गई।

जांच में सामने आया कि यह पूरा मामला पद का दुरुपयोग, मिलीभगत और हितों के टकराव का है। विभागीय जांच निलंबन के साथ शुरू हुई और मार्च 2025 में चार आरोपों वाला आरोपपत्र जारी किया गया। अगस्त 2025 में आलोक दुबे की व्यक्तिगत सुनवाई हुई, जिसमें जांच अधिकारी ने पाया कि उन्होंने विवादित भूमि का अनुचित तरीके से बैनामा किया, बिना अनुमति संपत्ति खरीद-फरोख्त की और सरकारी आचरण नियमों का उल्लंघन किया।

सहायक महानिरीक्षक निबंधन की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि दुबे की संलिप्तता 41 संपत्तियों तक फैली हुई है। जिलाधिकारी ने आदेश में कहा कि राजस्व अभिलेखों में इस तरह की हेरफेर जनता के विश्वास को तोड़ने वाला अपराध है। इसी कारण दुबे को कानूनगो से हटाकर लेखपाल बनाया गया। साथ ही, क्षेत्रीय लेखपाल अरुणा द्विवेदी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

अब एसडीएम सदर स्तर पर आलोक दुबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि राजस्व प्रणाली में किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी, अभिलेखों में छेड़छाड़ या साठगांठ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि प्रशासन में पारदर्शिता और जनता का विश्वास बनाए रखा जा सके।

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