April 19, 2026

उत्तर कोरिया में फैला रहस्यमयी त्वचा रोग, चीन पर लगाया संक्रमण फैलाने का आरोप

नॉर्थ प्योंगान प्रांत के तीन जिलों में आपातकाल, मरीजों में सफेद धब्बे और पस के लक्षण

उत्तर कोरिया एक बार फिर से रहस्यमयी बीमारी की चपेट में है। इस बार मामला एक दुर्लभ त्वचा रोग का है, जिसके लक्षण मरीजों की त्वचा पर सफेद धब्बे, तेज खुजली और पस निकलने के रूप में सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह बीमारी उत्तर प्योंगान प्रांत के जोंगजू शहर और साक्जू, चांगसोंग व योम्जू काउंटियों में तेजी से फैल रही है। इसके बाद तीनों इलाकों में आपातकाल (Emergency) घोषित कर दिया गया है।

उत्तर कोरिया ने इस बीमारी के पीछे सीधे चीन को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का दावा है कि यह संक्रमण चीन से होकर देश में दाखिल हुआ है। खासतौर पर यह कहा जा रहा है कि चीन के ल्याओनिंग प्रांत में पहले ही इसी तरह की बीमारी के मामले सामने आए थे और वहां पर एहतियाती वैक्सीनेशन तक कराया गया था। लोगों के बीच यह धारणा मजबूत हो रही है कि बीमारी की जड़ें चीन से जुड़ी हैं। यही कारण है कि कई लोग इसे कोरोना महामारी से जोड़कर देख रहे हैं, जो साल 2019 में चीन से पूरी दुनिया में फैली थी।

बीमारी को लेकर उत्तर कोरिया की सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रभावित इलाकों में क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं और मरीजों को गंभीर और सामान्य श्रेणी में बांटकर उनका इलाज किया जा रहा है। जिन मरीजों की स्थिति नाजुक है, उनके लिए विशेष छुट्टी और आराम की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार ने सितंबर के अंत तक बीमारी पर नियंत्रण और 10 अक्टूबर तक इसे पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। यदि ज़रूरत पड़ी तो समय सीमा अक्टूबर के अंत तक बढ़ाई जा सकती है।

स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय समिति ने पूरे प्रांत में बड़े स्तर पर सर्वे और जांच अभियान शुरू कर दिया है। अस्पतालों और क्लीनिकों को सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं ताकि यह संक्रमण अन्य जिलों तक न फैल सके। इसके अलावा प्रभावित इलाकों में आवाजाही पर भी सख्त पाबंदी लगा दी गई है। स्वास्थ्य कर्मचारियों की विशेष टीमें गांव-गांव जाकर कारणों की पहचान करने और संक्रमित लोगों का पता लगाने का काम कर रही हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह बीमारी उत्तर कोरिया की नहीं बल्कि बाहरी संक्रमण है। चीन पर लगाए गए आरोपों ने दोनों देशों के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है। फिलहाल यह बीमारी सिर्फ तीन जिलों तक सीमित बताई जा रही है, लेकिन सरकार की चिंता इस बात को लेकर है कि अगर हालात काबू में नहीं आए तो यह पूरे देश के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य आपदा में बदल सकती है।

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