April 24, 2026

Shardiya Navratri 2025 Day 2: मां ब्रह्मचारिणी की पूजा विधि, भोग, मंत्र और आरती

शारदीय नवरात्रि का दूसरा दिन मां ब्रह्मचारिणी को समर्पित होता है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, ज्ञान और वैराग्य की देवी मानी जाती हैं। इस दिन भक्त उनके पूजन से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति पाते हैं और सभी बाधाएं दूर होती हैं। माना जाता है कि सच्चे मन से की गई पूजा से मां ब्रह्मचारिणी प्रसन्न होकर अपने भक्तों को सफलता और विजय का आशीर्वाद देती हैं।

 

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल, सशक्त और सुंदर बताया गया है। वे सफेद वस्त्र धारण करती हैं और उनके एक हाथ में अष्टदल की माला तथा दूसरे हाथ में कमंडल रहता है। यह स्वरूप शास्त्र, तंत्र-मंत्र और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक है। उनका स्वभाव अत्यंत शांत और दयालु है। कहते हैं कि जो भी श्रद्धा से मां की उपासना करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

 

नवरात्रि के दूसरे दिन सफेद और पीले रंग का विशेष महत्व होता है। भक्त इस दिन सफेद या पीले रंग के वस्त्र धारण करते हैं क्योंकि यह रंग पवित्रता और तपस्या का प्रतीक माने जाते हैं। पूजा में मां ब्रह्मचारिणी को मिसरी का भोग लगाया जाता है। इसके साथ ही पीले फूल, पीले फल और पीले रंग की मिठाइयां अर्पित करने की परंपरा है। ऐसा करने से मानसिक शांति और सफलता की प्राप्ति होती है।

 

पूजा विधि में सबसे पहले सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर घर के पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध किया जाता है। इसके बाद मां को पंचामृत स्नान कराया जाता है और पीले वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। भक्त दीपक जलाकर मिसरी, फल और दूध से बनी मिठाई का भोग लगाते हैं। फिर हवन में आहुति देकर अंत में मां की आरती की जाती है।

 

मां ब्रह्मचारिणी की आरती और मंत्र का जाप भक्तों के लिए बेहद फलदायी माना गया है। “दधाना करपद्माभ्याम्, अक्षमालाकमण्डलू” मंत्र और “ओम ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः” का जप करने से भक्त को ज्ञान और शांति की प्राप्ति होती है। शाम के समय भी मां की आरती कर “मां ब्रह्मचारिणी की जय” का जयकारा लगाया जाता है।

 

ऐसा विश्वास है कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में तप, संयम और आत्मबल बढ़ता है। भक्तों का कहना है कि मां की उपासना से सभी प्रकार की कठिनाइयां दूर होती हैं और जीवन में सफलता के नए मार्ग खुलते हैं। यही कारण है कि नवरात्रि का यह दूसरा दिन हर भक्त के लिए विशेष और मंगलकारी माना जाता है।

 

 

आरती – मां ब्रह्मचारिणी

 

जय अंबे ब्रह्माचारिणी माता।

जय चतुरानन प्रिय सुख दाता।।

 

ब्रह्मा जी के मन भाती हो।

ज्ञान सभी को सिखलाती हो।।

 

ब्रह्मा मंत्र है जाप तुम्हारा।

जिसको जपे सकल संसारा।।

 

जय गायत्री वेद की माता।

जो मन निस दिन तुम्हें ध्याता।।

 

कमी कोई रहने न पाए।

कोई भी दुख सहने न पाए।।

 

उसकी विरति रहे ठिकाने।

जो तेरी महिमा को जाने।।

 

रुद्राक्ष की माला ले कर।

जपे जो मंत्र श्रद्धा दे कर।।

 

आलस छोड़ करे गुणगाना।

मां तुम उसको सुख पहुंचाना।।

 

ब्रह्माचारिणी तेरो नाम।

पूर्ण करो सब मेरे काम।।

 

भक्त तेरे चरणों का पुजारी।

रखना लाज मेरी महतारी।।

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