GST 2.0: मिट्टी से बनी ईंटें नहीं होंगी सस्ती, धरी रह गई आम आदमी की सपनों का घर बनाने की उम्मीद
जीएसटी 2.0 के बाद ईंट-भट्ठा उद्योग पर टैक्स दरों को लेकर जो संशय बना था, अब उसे राज्य कर विभाग ने स्पष्ट कर दिया है। राज्य सरकार ने आदेश जारी करके साफ किया है कि मिट्टी से बनी फ्लाई ऐश ईंट, निर्माण ईंट, सिलिकामय मिट्टी की ईंट और छत की टाइलों पर 12 फीसदी जीएसटी लागू रहेगा। वहीं, रेत से बनी ईंटों पर 5 फीसदी की दर रहेगी।
इस फैसले से आम आदमी के लिए सपनों का घर बनाना अभी भी आसान नहीं होगा। ईंट-भट्ठा उद्योग को जहां कुछ लोगों ने उम्मीद थी कि टैक्स कम होकर 5 फीसदी या उससे भी अधिक राहत मिलेगी, वहीं यह दर पहले जैसी ही बनी रही। इसके साथ ही ईंट भट्टों के लिए 6 फीसदी कंपोजीशन स्कीम का प्रावधान भी जारी रहेगा।
ईंट भट्टा उद्योग मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़ा है और इसमें लाखों श्रमिकों को मौसमी रोजगार मिलता है। उद्योग संगठनों का कहना है कि टैक्स दर कम होने से न केवल ईंटों की कीमतें घटती बल्कि ग्रामीण निर्माण कार्यों को भी बढ़ावा मिलता। लेकिन 12 फीसदी जीएसटी जारी रहने से ईंटों की कीमतें स्थिर रहेंगी और ग्रामीण उपभोक्ताओं पर दबाव बना रहेगा।
ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ टैक्स प्रैक्टिशनर्स के वाइस चेयरमैन धर्मेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि जीएसटी-2 की घोषणा के बाद से ही ईंट उद्योग में संशय बना हुआ था कि आखिर यह किस टैक्स स्लैब में रखा जाएगा। उद्योग को उम्मीद थी कि श्रम-आधारित इस ग्रामीण उद्योग को राहत मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि, यह भी बड़ी बात है कि 12 फीसदी स्लैब खत्म नहीं हुआ और इसे बनाए रखा गया है।
इस फैसले का सीधा असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। घर बनाने की योजना रखने वाले लोगों को अब भी उच्च लागत का सामना करना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार द्वारा उद्योग को दी गई राहत सीमित रहने से ग्रामीण निर्माण गतिविधियों में भी कमी आ सकती है।
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