स्वामी प्रसाद मौर्य की बसपा में वापसी पर सियासी अटकलें तेज
उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर से चर्चाएं तेज हैं। मामला है पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता स्वामी प्रसाद मौर्य का, जिनकी राजनीतिक पारी बसपा छोड़ने के बाद लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रही है। बीजेपी और सपा में रहकर भी वे अपना पुराना रुतबा हासिल नहीं कर पाए। यही वजह है कि अब उनकी बसपा में वापसी की अटकलें लगाई जा रही हैं।
बसपा में रहते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य का कद काफी बड़ा था। वे विधायक से लेकर मंत्री तक बने और 2007 के विधानसभा चुनाव में सीट हारने के बाद भी मायावती ने उन्हें अपनी कैबिनेट में जगह दी थी। यही नहीं, विपक्ष में रहते हुए वे नेता प्रतिपक्ष जैसे अहम पद पर भी रहे और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय महासचिव तक की जिम्मेदारी निभाई। लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद न तो बीजेपी में और न ही सपा में उन्हें वही पहचान मिली, जो बसपा में हासिल थी।
अब सवाल यह है कि क्या मायावती स्वामी प्रसाद को दोबारा अपने साथ लेंगी? बसपा सूत्रों का कहना है कि मामला इतना आसान नहीं है। पार्टी के अंदरूनी हलकों का मानना है कि स्वामी प्रसाद ने बसपा छोड़ने के बाद मायावती पर आक्रामक रुख अपनाया था। इसके अलावा, उनके कई विवादित बयान, खासकर सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं को लेकर दिए गए, मायावती को नागवार गुजरे हैं।
बसपा के एक बड़े नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि अगर स्वामी प्रसाद चुपचाप रहते तो वापसी संभव थी। लेकिन मौजूदा हालात में मायावती उन्हें लेने के लिए तैयार नहीं दिख रहीं। सूत्रों ने यह भी बताया कि हाल ही में स्वामी प्रसाद की बेटी और पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य ने दिल्ली में मायावती से मुलाकात की थी। संघमित्रा को बीजेपी ने 2024 में टिकट नहीं दिया था और वे भी अपने राजनीतिक भविष्य की राह तलाश रही हैं।
फिलहाल बसपा की तरफ से कोई हरी झंडी नहीं मिली है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि स्वामी प्रसाद मौर्य अब नरम तेवर अपनाकर मायावती का विश्वास जीतने की कोशिश कर रहे हैं। दलित समाज में अपनी आंबेडकरवादी छवि मजबूत करने के लिए वे धार्मिक नेताओं और सनातन धर्म पर हमला बोलते रहे हैं, जबकि मायावती पर अब वे अपेक्षाकृत नरमी दिखा रहे हैं।
इस तरह, उत्तर प्रदेश की सियासत में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या स्वामी प्रसाद मौर्य की घर वापसी बसपा में संभव हो पाएगी, या फिर उन्हें किसी और राह की तलाश करनी होगी।
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