पुतिन के साथी बेलारूस के साथ दिखी ट्रंप की आर्मी! मतलब क्या है इसका?
रूस और बेलारूस ने मिलकर सबसे बड़े सैन्य अभ्यास जापाद-2025 की शुरुआत कर दी है। यह अभ्यास नाटो देशों की सीमाओं के पास हो रहा है, जिसमें रूस और बेलारूस की ताकत का प्रदर्शन किया जा रहा है। जर्मन सेना के अनुसार इस अभ्यास में करीब 13 हजार सैनिक बेलारूस में और 30 हजार सैनिक रूस में भाग ले रहे हैं। हालांकि इस पूरे कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त शुरू हुई, जब अभ्यास स्थल पर दो अमेरिकी सैनिक नजर आए। अचानक उनकी मौजूदगी को लेकर सवाल खड़े हुए कि आखिर पुतिन के सबसे करीबी सहयोगी बेलारूस में अमेरिकी सैनिक कैसे दिखे?
बेलारूस सरकार ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि अमेरिकी सैनिक अभ्यास का हिस्सा नहीं थे, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर मौजूद थे। वियना दस्तावेज जैसे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किसी भी बड़े सैन्य अभ्यास में अन्य देशों के पर्यवेक्षकों को आमंत्रित करना अनिवार्य है। हालांकि रूस आमतौर पर ऐसा नहीं करता, लेकिन इस बार बेलारूस ने पारदर्शिता दिखाने के लिए विदेशी पर्यवेक्षकों को बुलाया। बेलारूस ने यह भी बताया कि कुल 23 देशों के सैनिक या पर्यवेक्षक इसमें शामिल हुए हैं, जिनमें नाटो सदस्य तुर्की और हंगरी भी शामिल हैं।
बेलारूस का यह कदम काफी मायनों में अहम माना जा रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने बेलारूस से दूरी बना ली थी, लेकिन अब मिन्स्क अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका ने हाल ही में बेलारूस की एयरलाइन बेलाविया पर लगे कुछ प्रतिबंध हटाए हैं और ट्रंप प्रशासन मिन्स्क में अमेरिकी दूतावास दोबारा खोलने पर विचार कर रहा है। इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बेलारूस के राष्ट्रपति लुकाशेंको को एक निजी नोट भी भेजा था। यह संकेत देता है कि बेलारूस धीरे-धीरे पश्चिम के साथ भी रिश्ते सुधारने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को लेकर हालांकि कयासों का दौर तेज है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह किसी सैन्य गठजोड़ का हिस्सा नहीं बल्कि एक राजनीतिक और कूटनीतिक संदेश है। बेलारूस, रूस का करीबी सहयोगी होने के बावजूद यह जताना चाहता है कि वह अमेरिका और पश्चिमी देशों से पूरी तरह अलग-थलग नहीं है। यह कदम एक तरह से मिन्स्क की दोहरी रणनीति को दिखाता है—एक ओर रूस का साथ देना और दूसरी ओर अमेरिका के साथ भी संवाद बनाए रखना।
कुल मिलाकर, जापाद-2025 सिर्फ एक सैन्य अभ्यास भर नहीं है बल्कि इसके जरिए कई देशों के बीच बदलते समीकरण भी नजर आ रहे हैं। अमेरिका के सैनिकों का बेलारूस की धरती पर दिखना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में यूरोप और एशिया की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं। बेलारूस जिस तरह पारदर्शिता का संदेश दे रहा है और अमेरिका से रिश्ते सुधारने की कोशिश कर रहा है, उससे यह साफ है कि वह खुद को पूरी तरह रूस पर निर्भर नहीं दिखाना चाहता। यही वजह है कि इस अभ्यास में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी को ‘बड़ी रणनीतिक चाल’ माना जा रहा है।
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