सऊदी अरब ने बढ़ाई नागरिकों की जीवन प्रत्याशा, मौत को मात देने की नई पहल
सऊदी अरब ने अपने नागरिकों की औसत जीवन प्रत्याशा में बड़ा बदलाव किया है। 1960 के दशक में जहां यहां के लोगों की औसत आयु 46 साल थी, वहीं अब यह बढ़कर 79 साल हो चुकी है। यह सफलता बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, आधुनिक चिकित्सा प्रणाली और पोषण संबंधी सुधारों की वजह से मिली है। विजन 2030 के तहत सऊदी अरब ने लक्ष्य रखा है कि नागरिकों की औसत उम्र को 80 साल तक पहुंचाया जाए। यह बदलाव न केवल समाज बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक असर डाल रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधार इस बदलाव की बड़ी वजह बने हैं। सऊदी सरकार ने बीमारियों की रोकथाम, हेल्थकेयर सिस्टम को आधुनिक बनाने और नागरिकों को संतुलित खानपान की आदतें अपनाने के लिए कई कदम उठाए। इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं की लागत को घटाने, उत्पादन बढ़ाने और सामाजिक एकता को मजबूत करने पर भी काम हुआ। जब लोग कम बीमार पड़ते हैं तो इलाज का खर्च घटता है और स्वस्थ नागरिक लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। इससे देश की उत्पादकता भी बढ़ती है और अरबों-खरबों डॉलर की बचत होती है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी से न केवल लोगों की आमदनी और जीवन स्तर सुधरता है, बल्कि नए उद्योगों का भी विकास होता है। जैविक दवाओं, बीमा, बुजुर्गों की देखभाल और हेल्थकेयर तकनीकों का विस्तार इसी का नतीजा है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी उम्र तभी सार्थक है जब नागरिक स्वस्थ रहें। इसके लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, पौष्टिक आहार, पर्याप्त नींद, तनाव कम करना और बुजुर्गों के लिए सामाजिक सहयोग आवश्यक है।
वैश्विक स्तर पर भी अब उम्र और बुढ़ापे की परिभाषा बदल रही है। पहले 60 वर्ष की आयु को बुजुर्ग माना जाता था, लेकिन अब यह सीमा 70 से 80 साल तक बढ़ गई है। इसी दिशा में सऊदी अरब ने “हिवोल्यूशन” नामक संगठन बनाया है, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने और स्वस्थ वृद्धावस्था को प्रोत्साहित करने के लिए शोध कर रहा है। यह संगठन भविष्य की स्वास्थ्य नीतियों और रणनीतियों में अहम भूमिका निभा रहा है।
सऊदी अरब ने विजन 2030 के तहत स्वास्थ्य, पर्यावरण, खाद्य और जल सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। साथ ही नई तकनीक और उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि नागरिकों को लंबा और बेहतर जीवन मिल सके। आने वाले वर्षों में सऊदी सरकार का उद्देश्य न केवल जीवन प्रत्याशा को 80 साल तक ले जाना है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि नागरिक अधिकतम समय तक स्वस्थ और सक्रिय रह सकें। इससे देश एक मजबूत और टिकाऊ अर्थव्यवस्था के साथ-साथ स्वस्थ समाज की ओर भी बढ़ेगा।
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