दोहा के बाद इजराइल का अगला टारगेट तुर्किये? अरब देशों में महासंग्राम के आसार
कतर की राजधानी दोहा पर हाल ही में हुए इजराइली हमलों ने पूरे अरब जगत को हिला दिया है। 9 और 10 सितंबर को हुई एयर स्ट्राइक्स में हमास के बड़े नेताओं को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया। इन हमलों के बाद इजराइल ने साफ संदेश दिया है कि वह अपने दुश्मनों को धरती के किसी भी कोने से खोजकर खत्म करेगा। इस आक्रामक रुख ने अरब देशों में गुस्से की लहर पैदा कर दी है और अब सऊदी अरब, यूएई, जॉर्डन सहित कई इस्लामिक देशों ने कतर के समर्थन में एकजुटता दिखाई है। वहीं, इन घटनाओं के बीच खबरें हैं कि इजराइल का अगला निशाना तुर्किये हो सकता है।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना प्रमुख इयाल जमीर ने साफ कर दिया है कि आतंक को शरण देने वाले किसी भी देश को बख्शा नहीं जाएगा। यही कारण है कि अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इजराइल तुर्किये की राजधानी अंकारा या आर्थिक केंद्र इस्तांबुल पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो हालात बेहद गंभीर हो जाएंगे, क्योंकि तुर्किये नाटो का सदस्य है। ऐसे में यह सवाल उठने लगा है कि क्या इजराइल नाटो के आर्टिकल 5 को चुनौती देकर सीधे एक बड़े वैश्विक संघर्ष को जन्म देगा।
अरब देशों में इस समय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। कतर ने आरोप लगाया है कि इजराइल और अमेरिका ने वादाखिलाफी की है। अगस्त में अमेरिका और इजराइल ने दोहा में हमास ठिकानों पर हमला न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन 9 सितंबर को यह गारंटी टूट गई। इजराइली मीडिया ने इन हमलों पर खुलेआम जश्न मनाया, जिससे अरब देशों का आक्रोश और गहरा हो गया। दोहा में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मौजूदगी यह दिखाती है कि अरब जगत इजराइल के खिलाफ अब सामूहिक कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
मिडिल ईस्ट फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक इजराइल, तुर्किये को आतंकवाद का प्रायोजक बताकर उस पर हमले को आत्मरक्षा की कार्रवाई ठहरा सकता है। हालांकि नाटो देशों के भीतर भी इसको लेकर बड़ा मतभेद देखने को मिल सकता है। अमेरिका खुले तौर पर इजराइल का समर्थक है, जबकि तुर्किये ने स्वीडन और फिनलैंड की नाटो सदस्यता का लंबे समय से विरोध किया है। ऐसे में आर्टिकल 5 लागू करने के सवाल पर नाटो देशों में सहमति बनना मुश्किल होगा।
इस बीच, ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) के 57 सदस्य देश इजराइल के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। चर्चाएं हैं कि अगर हालात नहीं संभले तो ये देश इजराइल के खिलाफ जिहाद का ऐलान भी कर सकते हैं। इस स्थिति में अरब देश रूस और चीन के खेमे से जुड़ सकते हैं और अमेरिका-इजराइल को सीधी चुनौती दे सकते हैं। साफ है कि कतर पर हुए इजराइली हमले ने सिर्फ एक क्षेत्रीय विवाद नहीं, बल्कि एक संभावित वैश्विक युद्ध की चिंगारी जला दी है, जिसके असर से पूरा मध्यपूर्व और पश्चिमी दुनिया हिल सकती है।
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