99 रन पर नॉट आउट रहे देवदत्त पडिक्कल, टीम के लिए कुर्बान किया शतक, हबली टाइगर्स पहुंचे फाइनल के करीब
महाराजा ट्रॉफी T20 2025 के क्वालिफायर-1 में हबली टाइगर्स और मंगलौर ड्रैगन्स के बीच खेले गए मुकाबले में दर्शकों ने रोमांचक क्रिकेट का लुत्फ उठाया। इस मैच में हबली टाइगर्स के कप्तान देवदत्त पडिक्कल ने ऐसा प्रदर्शन किया, जिसने सभी का दिल जीत लिया। पडिक्कल ने नाबाद 99 रनों की कप्तानी पारी खेलकर अपनी टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया, हालांकि वह शतक से महज 1 रन दूर रह गए।
ओपनिंग करने उतरे पडिक्कल ने पूरे 20 ओवर तक क्रीज पर टिके रहकर विपक्षी गेंदबाजों पर जमकर प्रहार किए। उन्होंने अपनी पारी में 10 चौके और 5 शानदार छक्के लगाए और 154.69 की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। आखिरी ओवर में उनके पास शतक पूरा करने का मौका था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत माइलस्टोन से ऊपर टीम के हित को रखा। दरअसल, पारी की अंतिम दो गेंदों पर उन्हें शतक के लिए 2 रन चाहिए थे, लेकिन उन्होंने रन लेकर स्ट्राइक अपने साथी बल्लेबाज मन्वंत कुमार एल को दे दी। इसके बाद मन्वंत ने आखिरी गेंद पर छक्का जड़ दिया और टीम का स्कोर 210 रन तक पहुंचा दिया। पडिक्कल की इस निस्वार्थ कप्तानी पारी की जमकर तारीफ हो रही है।
देवदत्त पडिक्कल इस सीजन में गजब की फॉर्म में हैं। वह महाराजा ट्रॉफी 2025 में अब तक सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं और उनका स्ट्राइक रेट भी 155 के पार है। हबली टाइगर्स ने उन्हें इस सीजन की नीलामी में 13.20 लाख रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर अपनी टीम में शामिल किया था। वह इस लीग के सबसे महंगे खिलाड़ी भी हैं और अपनी कीमत को सही साबित करते नजर आ रहे हैं। इस प्रदर्शन से उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह टीम इंडिया के भविष्य के भरोसेमंद बल्लेबाजों में से एक हैं।
गौरतलब है कि देवदत्त पडिक्कल टीम इंडिया के लिए पहले ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने अब तक 2 टेस्ट और 2 टी20 मैच खेले हैं। टेस्ट में उनके नाम एक अर्धशतक समेत 90 रन दर्ज हैं, जबकि टी20 में वह 38 रन बना चुके हैं। उन्होंने आखिरी बार भारत के लिए 2021 में टी20 और 2024 में टेस्ट मैच खेला था। इसके अलावा, इस साल पडिक्कल आईपीएल की चैंपियन टीम आरसीबी का हिस्सा भी रहे।
इस क्वालिफायर-1 जीत के बाद हबली टाइगर्स फाइनल के बेहद करीब पहुंच गई है। पडिक्कल की पारी को टूर्नामेंट के सबसे बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। टीम के लिए शतक कुर्बान करने का उनका जज्बा उन्हें एक सच्चा कप्तान साबित करता है और यही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि कही जाएगी।
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