ईरान का शक्ति प्रदर्शन, इज़राइल और अमेरिका को सीधा संदेश
ईरान ने दक्षिणी समुद्री क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास कर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। गौर करने वाली बात यह है कि पिछले महीने ही उसने रूस के साथ “कसारेक्स 2025” नामक संयुक्त अभ्यास किया था। अब अकेले किए गए इस अभ्यास को विशेषज्ञ केवल ताकत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि इज़राइल के लिए एक खास संदेश मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह कवायद दिखाती है कि ईरान किसी भी हालात में जवाबी हमले की स्थिति में है और दुश्मनों को उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इज़राइल और अमेरिका के हमलों के बाद तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ चल रही परमाणु वार्ताओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह संयुक्त राष्ट्र परमाणु निगरानी एजेंसी से पूरी तरह अलग नहीं होगा। इसका मतलब यह है कि ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रिश्ते तोड़ने के मूड में नहीं है, लेकिन दबाव में झुकने को भी तैयार नहीं।
एजेंसी प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल अजीज नसीरजादेह ने दावा किया कि देश ने अपनी सेनाओं को नई और उन्नत मिसाइलों से लैस कर दिया है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर दुश्मन ने कोई नई साहसिक कार्रवाई की, तो उसका करारा जवाब दिया जाएगा। इस बयान को इज़राइल और अमेरिका के लिए सीधा संदेश माना जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का यह कदम एक साथ कई मकसद साधने की कोशिश है। पहला, क्षेत्रीय स्तर पर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करना; दूसरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दिखाना कि वह दबाव में पीछे हटने वाला नहीं है; और तीसरा, रूस के साथ अपने बढ़ते सैन्य सहयोग को संतुलित करते हुए स्वतंत्र शक्ति के रूप में खुद को स्थापित करना।
कुल मिलाकर, ईरान ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह पश्चिमी दबाव या इज़राइली हमलों से डरने वाला नहीं है। इस तरह के कदमों से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की संभावना है, जिसका असर वैश्विक सुरक्षा और परमाणु वार्ता की दिशा पर भी पड़ सकता है।
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