May 2, 2026

पाकिस्तान में कुदरत का कहर… 48 घंटे में 340 मौतें, चारों ओर तबाही का मंजर

पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी इलाकों में आई भीषण बाढ़ ने हालात बेहद भयावह बना दिए हैं। पिछले 48 घंटों में 340 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 137 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। बुनेर, स्वात, शांगला, बट्टाग्राम, बाजौर और मनसेहरा समेत नौ जिलों में तबाही इतनी बड़ी है कि करीब 2,000 राहतकर्मी लगातार मलबे से शव और जीवित लोगों को निकालने की मशक्कत कर रहे हैं।

 

शनिवार को राहत दलों ने बाढ़ और भूस्खलन से तबाह घरों के खंडहरों से 63 और शव बरामद किए। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बारिश का दौर यहीं नहीं थमेगा, आने वाले दिनों में इसका असर और भी तेज हो सकता है। सबसे ज्यादा नुकसान खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के बुनेर जिले में हुआ है, जहाँ तेज बहाव वाले पानी ने पूरे-के-पूरे गांव को मिनटों में बहा दिया।

 

बुनेर जिले के चश्मदीदों का कहना है कि बाढ़ सिर्फ पानी की नहीं थी, बल्कि पत्थरों और भारी चट्टानों की बाढ़ थी। देखते ही देखते 60 से 70 घर तबाह हो गए और कई लोग लापता हो गए। एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस स्टेशन तक बह गया और अगर समय रहते वे ऊँचाई पर न चढ़ते, तो खुद भी बच नहीं पाते। पीर बाबा और मलिकपुरा जैसे गांव पूरी तरह उजड़ गए हैं।

 

घायलों का कहना है कि अस्पताल तक पहुँचने से पहले ही कई लोगों ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों में महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं। कई लोग उस समय जंगल और पहाड़ियों में मवेशी चराने और लकड़ी इकट्ठा करने गए हुए थे, जिससे वे बाल-बाल बचे। प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

 

स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इस साल सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है और यही जलवायु परिवर्तन का सबसे खतरनाक असर है। सिर्फ 26 जून से अब तक बाढ़ और भूस्खलन से पाकिस्तान में 540 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। राहतकर्मी पीड़ितों के लिए टेंट, खाना और मेडिकल सुविधाएँ मुहैया करा रहे हैं। वहीं, कई गांवों में सामूहिक अंत्येष्टि का गमगीन माहौल पसरा हुआ है।

 

बुनेर के सुलेमान खान जैसे लोगों ने तो अपने पूरे परिवार को खो दिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने 25 रिश्तेदारों को एक ही दिन में बाढ़ में गंवा दिया। पीर बाबा इलाके में शव लकड़ी के तख्तों पर रखकर ले जाए जा रहे हैं और लोग अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई दे रहे हैं। चारों तरफ मातम है और लोग अब भी यह सोचकर सहमे हुए हैं कि आने वाले दिनों में बारिश और तेज हुई तो क्या होगा।

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