दवाइयों के बिज़नेस में जबरदस्त मुनाफा, ऐसे खोलें अपना मेडिकल स्टोर
अगर आप कोई ऐसा बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं जिसमें लगातार कमाई हो, जोखिम कम हो और नकद लेन-देन की सुविधा भी मिले, तो मेडिकल स्टोर यानी दवाइयों की दुकान एक भरोसेमंद विकल्प हो सकता है। दवा का कारोबार कभी मंदा नहीं पड़ता क्योंकि बीमारियां और इलाज की जरूरतें हमेशा बनी रहती हैं।
मेडिकल स्टोर खोलने के लिए सबसे जरूरी शर्त है कि आपके पास फार्मेसी की डिग्री या डिप्लोमा (B.Pharm या D.Pharm) हो। यदि आपके पास यह कोर्स नहीं है, तो आपको एक योग्य फार्मासिस्ट रखना होगा, जिसके पास डिग्री और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट हो। बिना फार्मासिस्ट के स्टोर चलाना कानूनन अपराध है।
दवा की दुकान खोलने के लिए ड्रग कंट्रोलर ऑफिस से लाइसेंस लेना भी जरूरी है। इसके लिए फार्मासिस्ट का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, दुकान का नक्शा, आधार-पैन कार्ड, दुकान का मालिकाना कागज़ या किराए का प्रमाण और GST रजिस्ट्रेशन जैसे दस्तावेज़ जमा करने पड़ते हैं। बिना लाइसेंस दवा बेचना गंभीर अपराध माना जाता है।
स्टोर में रखी दवाइयों की एक्सपायरी पर ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कोई भी एक्सपायर दवा गलती से भी बिक गई तो भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द होने तक की कार्रवाई हो सकती है। इसलिए इस बिज़नेस में सतर्क रहना सबसे जरूरी है।
एक औसत मेडिकल स्टोर खोलने में 7 से 10 लाख रुपये का निवेश लगता है, जिसमें शुरुआती स्टॉक, दुकान की साज-सज्जा, फ्रिज, काउंटर, अलमारी और लाइसेंस बनवाने के खर्च शामिल होते हैं। रिटेल स्तर पर मुनाफा 20-25% तक हो सकता है, जबकि होलसेल सप्लाई करने पर यह 30-40% तक पहुंच जाता है।
अगर खुद का स्टोर खोलने में झिझक है, तो किसी बड़े ब्रांड की फ्रैंचाइज़ी लेकर भी काम शुरू किया जा सकता है। इससे ब्रांड की पहचान पहले से होने के कारण ग्राहक जल्दी जुड़ते हैं और शुरुआती जोखिम कम हो जाता है।
नियमों का पालन इस बिज़नेस में बेहद जरूरी है। सभी कागज़ात पूरे होने चाहिए, लाइसेंस सही तरीके से होना चाहिए और कानून की अनदेखी कतई नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से मेडिकल स्टोर का बिज़नेस सुरक्षित और मुनाफे वाला साबित होता है।
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