April 30, 2026

कंगाल पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर इतनी दौलत के मालिक, जानिए कमाई का तरीका

पाकिस्तान की आर्थिक हालत बिगड़ती जा रही है, लेकिन देश के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर की संपत्ति लगातार बढ़ती जा रही है। हाल ही में अमेरिका के दौरे पर मौजूद असीम मुनीर ने भारत को धमकियां देने के साथ-साथ परमाणु हमले की चेतावनी भी दी, लेकिन इनके पीछे एक बड़ा आर्थिक मकसद भी छुपा हुआ है। पाकिस्तान की सेना देश का सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप है, जिसके तहत 100 से ज्यादा कंपनियां चल रही हैं। ये कंपनियां भारी मुनाफा कमाती हैं और इनका पूरा नियंत्रण आर्मी चीफ के पास होता है।

पाकिस्तानी सेना का प्रभाव सिर्फ सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका कारोबार रियल एस्टेट, बैंकिंग, सीमेंट, डेयरी और ट्रांसपोर्ट जैसे कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। फौजी फाउंडेशन, आर्मी वेलफेयर ट्रस्ट, शाहीन फाउंडेशन और बहरिया फाउंडेशन जैसे संगठन अरबों रुपये के बिजनेस करते हैं, जो बाहर से कल्याणकारी संस्थाओं जैसे लगते हैं, लेकिन वास्तव में ये आर्थिक साम्राज्य हैं। इन सभी का पूरा नियंत्रण असीम मुनीर के हाथों में है, जो पाकिस्तान की सबसे बड़ी संपत्ति के मालिक बनाते हैं।

रियल एस्टेट क्षेत्र में पाकिस्तान की डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (DHA) सबसे बड़ा नाम है, जो कराची, लाहौर, इस्लामाबाद जैसे बड़े शहरों में अरबों रुपये के हाउसिंग प्रोजेक्ट्स चलाती है। ये प्रोजेक्ट सेना की आर्थिक ताकत का प्रमुख स्तंभ हैं। पाकिस्तानी लेखक आयशा सिद्दीका की किताब Military Inc के अनुसार, सेना का कुल कारोबार 40 से 100 अरब डॉलर के बीच माना जाता है, जो पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति के विपरीत बहुत बड़ी दौलत दर्शाता है।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, असीम मुनीर की कुल संपत्ति करीब 8 लाख डॉलर यानी लगभग 7 करोड़ रुपये बताई जाती है। पाकिस्तान की आर्थिक तंगी को देखते हुए इतनी संपत्ति असाधारण है। यह साफ करता है कि आर्मी चीफ का पद सिर्फ सैन्य नेतृत्व का नहीं, बल्कि आर्थिक साम्राज्य के CEO जैसा है। देश की खराब आर्थिक स्थिति के बावजूद, असीम मुनीर की संपत्ति लगातार बढ़ रही है क्योंकि उनके पास देश की बड़ी कंपनियों और फंड्स पर पूरा नियंत्रण है।

इस स्थिति में यह सवाल उठता है कि जब पाकिस्तान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहा है, तो सेना के उच्च अधिकारी इतने बड़े बिजनेस ग्रुप्स और संपत्तियों के मालिक कैसे बन जाते हैं? इस सवाल का जवाब पाकिस्तान की सैन्य और आर्थिक सत्ता के आपस में जुड़े नेटवर्क में छुपा है, जो देश के आम नागरिकों की समस्याओं से बिलकुल अलग और ऊपर है।

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