April 30, 2026

भारत पर टैरिफ दर टैरिफ क्यों लगा रहे हैं ट्रंप? अमेरिका को नहीं रास आ रही भारत की स्वतंत्र विदेश नीति

भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते एक बार फिर से तनाव के दौर में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने का फैसला लेते हुए एक कड़ा संदेश दिया है। कई दौर की बातचीत और ‘दोस्ती’ की सार्वजनिक घोषणाओं के बावजूद ट्रंप का यह फैसला बताता है कि वॉशिंगटन भारत की मौजूदा रणनीतिक स्वायत्तता से खुश नहीं है। खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत की तटस्थ भूमिका और रूस से तेल की लगातार खरीद ने ट्रंप प्रशासन को नाराज कर दिया है।

 

अमेरिका चाहता है कि भारत वैश्विक मामलों में उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चले। लेकिन भारत ने कई बार स्पष्ट कर दिया है कि वह हर मसले पर अपनी स्वतंत्र नीति के अनुसार निर्णय लेगा। यही बात ट्रंप को खटक रही है और उन्होंने अब टैरिफ को एक दबाव बनाने वाले हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। भारत पर लगाया गया 50% टैरिफ इसका ताजा उदाहरण है।

 

भारत द्वारा रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना अमेरिका के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। यूक्रेन युद्ध से पहले भारत रोजाना जहां 68,000 बैरल तेल खरीदता था, वहीं अब यह आंकड़ा 21.5 लाख बैरल तक पहुंच गया है। राष्ट्रपति ट्रंप इसे युद्धरत रूस को आर्थिक रूप से मज़बूत करने के रूप में देख रहे हैं। हालांकि चीन भी बड़ी मात्रा में रूस से तेल खरीद रहा है, लेकिन ट्रंप का ध्यान फिलहाल भारत पर केंद्रित है।

 

इसके अलावा, अमेरिका BRICS जैसे संगठन की बढ़ती सक्रियता से भी असहज है, जिसमें भारत एक अहम सदस्य है। अमेरिका चाहता है कि भारत ब्रिक्स, रूस और अपने पुराने सहयोगियों से दूरी बनाकर पश्चिमी गुट में शामिल हो। ट्रंप प्रशासन की यह रणनीति चीन के खिलाफ भारत का इस्तेमाल करने की भी मंशा रखती है, जैसा उसने रूस के खिलाफ यूक्रेन को आगे किया।

 

भारत की “स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी” यानी रणनीतिक स्वायत्तता ही ट्रंप की असली परेशानी है। भारत किसी भी बाहरी दबाव में आए बिना, अपने हितों को सर्वोपरि मानते हुए स्वतंत्र रूप से विदेश नीति तय कर रहा है। यही कारण है कि अमेरिका बार-बार भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत अब भी अपनी नीति पर अडिग दिखाई दे रहा है।

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