पिता की कर दी श्रद्धांजलि, 25 लाख मुआवजे की लालच में बेटे की करतूत उजागर
हरियाणा के फरीदाबाद जिले के पन्हेड़ा कलां गांव में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बेटे ने अपने जिंदा पिता की मौत का झूठा नाटक रच डाला। उसने बाकायदा पूरे गांव में पोस्टर चस्पा करवाए, मंदिरों में रोटियां बंटवाईं और ढोल-नगाड़ों के साथ श्रद्धांजलि सभा तक आयोजित करवा दी। उसका मकसद केवल इतना था कि वह पिता की झूठी मौत के नाम पर सरकार से 25 लाख रुपये का मुआवजा हासिल कर सके। लेकिन बेटे की इस चालबाज़ी की पोल खुद उसके पिता ने खोल दी।
पूरा मामला 79 वर्षीय लालचंद उर्फ लूला से जुड़ा है, जो फिलहाल जीवित हैं और उत्तर प्रदेश के कोसीकलां में अपने भाई के यहां रह रहे थे। लालचंद के बेटे राजेंद्र ने यह प्रचार किया कि उनके पिता की मृत्यु महाकुंभ की भगदड़ में हो गई। उसने दावा किया कि पिता गोवर्धन परिक्रमा के लिए निकले थे और फिर बनारस होते हुए महाकुंभ पहुंचे, जहां से उनका कोई पता नहीं चला। जब काफी खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिला, तो गांववालों की सलाह पर श्रद्धांजलि सभा रख दी गई। राजेंद्र ने न केवल यह सब किया, बल्कि खुद श्रद्धांजलि कार्यक्रम में नाचते भी दिखा।
हालांकि सच्चाई तब सामने आई जब एक रिश्तेदार ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि सभा का वीडियो देखकर लालचंद को इसकी जानकारी दी। लालचंद ने इस पर वीडियो रिकॉर्ड कर गांव के सरपंच को भेजा और फिर खुद गांव पहुंच गए। वहां उन्होंने पंचायत में पूरी कहानी बताई कि कैसे उनका बेटा उन्हें मारता था, खाना नहीं देता था और नौकरों की तरह काम कराता था। यहां तक कि उनकी ढाई एकड़ जमीन भी हड़पकर उस पर आश्रम बना लिया।
गांव में जब यह मामला पूरी तरह उजागर हुआ तो मंगलवार को शिव मंदिर में पंचायत बुलाई गई। पंचायत ने राजेंद्र और उसके परिवार को गांव से बहिष्कृत करने का फैसला सुनाया और प्रशासन को इस संबंध में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की। जानकारियों के मुताबिक, राजेंद्र पहले होटल मैनेजमेंट में प्रशिक्षित था, लेकिन बाद में खुद को ‘स्वामी’ घोषित कर पिता की जमीन पर ही आश्रम बना लिया, जहां वह परिवार समेत रह रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल गांव में हलचल मचा दी, बल्कि यह भी दिखा दिया कि कैसे लालच इंसान को रिश्तों से परे धकेल देता है। एक बेटे द्वारा अपने जीवित पिता को मृत घोषित करना और उसके नाम पर मुआवजा हड़पने की कोशिश समाज के लिए एक शर्मनाक मिसाल बन गई है।
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