पाकिस्तान के पास कच्चा तेल नहीं, फिर ट्रंप क्यों कह रहे हैं ‘विशाल तेल का भंडार’? भारत-यूएस ट्रेड डील पर क्या होगा असर?
अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल ही में फाइनल हुई ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के विशाल तेल भंडार का जिक्र किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि इस डील के तहत पाकिस्तान के तेल भंडार को विकसित किया जाएगा और आने वाले समय में पाकिस्तान भारत को भी तेल बेच सकता है। लेकिन असलियत कुछ और ही है। पाकिस्तान खुद अपनी तेल की ज़रूरत का करीब 80 फीसदी इंपोर्ट करता है और उसके पास सीमित तेल भंडार ही मौजूद हैं।
पाकिस्तान की तेल उत्पादन क्षमता बहुत कम है और हाल ही में उनका प्रोडक्शन लगभग 11 प्रतिशत गिर चुका है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान के कुल तेल भंडार का वैश्विक भंडार में हिस्सा मात्र 0.021 फीसदी है, जो उसकी घरेलू मांग को भी पूरा करने के लिए काफी नहीं है। ऐसे में ट्रंप के ‘विशाल तेल भंडार’ वाले बयान को ज्यादातर विश्लेषक राजनीतिक रणनीति और भारत पर दबाव बनाने की चाल के रूप में देख रहे हैं।
ट्रंप के बयान के पीछे अमेरिकी रणनीति को समझने पर पता चलता है कि वह पाकिस्तान के साथ इस डील के माध्यम से भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना चाहते हैं। अमेरिका ने अभी तक भारत के साथ कोई बड़ी ट्रेड डील फाइनल नहीं की है, इसलिए पाकिस्तान के साथ सहयोग कर वह भारत को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। यह रणनीति अमेरिका की पूर्व अन्य ट्रेड डील्स में भी साफ दिखी है, जहां राजनीतिक और आर्थिक दोनों ही उद्देश्यों को साधा गया है।
भारत के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तान के ‘तेल भंडार’ का दांव राजनीतिक माहौल को गर्मा सकता है, लेकिन वास्तविक ऊर्जा जरूरतों और तेल आपूर्ति की दृष्टि से पाकिस्तान भारत के लिए तेल का बड़ा निर्यातक बनने की संभावना फिलहाल कम ही दिखती है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विविध स्त्रोतों और सहयोगों पर ज्यादा निर्भर रहेगा।
इस पूरे मामले में साफ है कि ट्रंप के बयान को सिर्फ तेल भंडार के संदर्भ में नहीं लेना चाहिए, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक और राजनीतिक संदेश भी है, जो आने वाले समय में भारत-अमेरिका-पाकिस्तान त्रिकोणीय संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
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