भारत को 16 महीनों से था इस गुड न्यूज का इंतजार, मैन्युफैक्चरिंग में रिकॉर्ड सुधार से चीन-अमेरिका को मिली चुनौती
अगस्त की शुरुआत के साथ ही भारत को वो आर्थिक खबर मिली जिसका इंतजार बीते 16 महीनों से हो रहा था। देश का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई जुलाई में बढ़कर 59.1 पर पहुंच गया है, जो जून में 58.4 था। यह मार्च 2024 के बाद से सबसे मजबूत सुधार को दर्शाता है और वैश्विक मंच पर भारत की ताकत को फिर से स्थापित करता है। पीएमआई का 50 से ऊपर रहना संकेत है कि देश की उत्पादन गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
इस तेजी की मुख्य वजह रही है नए ऑर्डर्स और उत्पादन में मजबूत वृद्धि। एचएसबीसी के मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी के अनुसार, कुल बिक्री बीते 5 वर्षों में सबसे तेज गति से बढ़ी है, जिससे उत्पादन दर 15 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। हालांकि, सर्वे में यह भी सामने आया कि कारोबारी आत्मविश्वास की समग्र भावना तीन साल के निचले स्तर पर है, लेकिन आगामी 12 महीनों में बढ़ोतरी की उम्मीद अब भी बनी हुई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में कच्चे माल की लागत में भी इजाफा हुआ है। एल्युमिनियम, चमड़ा, रबर और स्टील जैसे सामग्रियों की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई, जिससे कंपनियों को अपने शुल्क बढ़ाने का मौका मिला। यह भी एक संकेत है कि बाजार में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है।
एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई रिपोर्ट एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी की जाती है और यह करीब 400 भारतीय मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के क्रय प्रबंधकों के उत्तरों पर आधारित होती है।
इस आर्थिक प्रगति ने भारत को वैश्विक मंच पर फिर से मजबूती से खड़ा कर दिया है, खासकर ऐसे वक्त में जब चीन और अमेरिका की अर्थव्यवस्थाएं सुस्ती का सामना कर रही हैं। भारत की यह छलांग न केवल निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार और निर्यात के अवसरों को भी मजबूती दे सकती है।
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