May 5, 2026

10 साल से विकास का इंतज़ार, सिरसी गांव की बदहाली पर अब फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

उत्तर प्रदेश के ग्राम सिरसी से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जो यह सवाल खड़ा करती हैं कि क्या वास्तव में विकास गांव तक पहुंचा भी है या फिर सरकारी योजनाएं सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित हैं? सिरसी गांव के हालात देखकर यही लगता है कि यहां विकास की रफ्तार थम सी गई है, और प्रशासनिक लापरवाही ने गांव को बदहाली की ओर धकेल दिया है।

 

ग्रामीणों का कहना है कि बीते 10 वर्षों से वे सड़क, नाली, आवास और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद आज तक न तो पक्की सड़क बनी, न ही नालियां तैयार की गईं। हालात ये हैं कि बारिश के दिनों में पूरा गांव कीचड़ में तब्दील हो जाता है और लोग घर से निकलने में भी हिचकते हैं।

 

ग्रामीणों ने गांव की प्रधानी पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जब से गांव में पंचायत बनी है, प्रधान और सचिव ने मिलकर सरकारी फंड का दुरुपयोग किया है। विकास कार्यों के लिए आई धनराशि का गबन कर लिया गया, लेकिन गांव की तस्वीर वैसी की वैसी बनी रही। लोगों का आरोप है कि दोनों के बीच मिलीभगत है, जिससे वर्षों से विकास ठप पड़ा है।

 

सिरसी के प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी काफी चिंताजनक है। स्कूल परिसर में पानी भरा रहता है, जिससे बच्चों को आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय की मरम्मत और निर्माण कार्य की ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्कूल में सफाई व्यवस्था बेहद खराब है, और शिक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति हो रही है।

 

गांव के बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में जांच करवाई जाए और जिन लोगों ने विकास की राशि का दुरुपयोग किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे और अपनी आवाज़ पंचायत और प्रशासन तक लगातार पहुंचाएंगे।

 

यह पूरी कहानी आज भी ग्रामीण भारत की उस सच्चाई को सामने लाती है, जो अक्सर मीडिया की सुर्खियों से दूर रह जाती है। सिरसी गांव जैसे न जाने कितने गांव आज भी सरकार की योजनाओं के इंतजार में ठहरे हुए हैं, जहां न सड़क है, न पानी, न रोशनी, और न ही उम्मीद का उजाला।

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