ईरान की हुकूमत के खिलाफ खौफनाक साजिश का खुलासा: क्या सत्ता की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है?
एक खामोश क्रांति की जमीन तैयार हो चुकी है। सत्ता के गलियारों में ऐसा कुछ पक रहा है जो आने वाले वक्त में ईरान के पूरे राजनीतिक ढांचे को हिला सकता है। एक दावा, जिसने मध्य-पूर्व की राजनीति में भूचाल ला दिया है — रजा पहलवी ने कहा है कि ईरान के ही 50 हजार से अधिक अधिकारी अब खामेनेई शासन को पलटने की तैयारी में हैं।
ईरान के निर्वासित शाही वारिस और पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी का यह दावा महज़ एक बयान नहीं, बल्कि एक सुनियोजित आंदोलन की झलक है। उन्होंने बताया है कि सत्ता और सेना के अंदर से हजारों अधिकारी एक सुरक्षित डिजिटल नेटवर्क पर पंजीकृत हो चुके हैं। यह नेटवर्क गुप्त है, पर उसका उद्देश्य बिल्कुल साफ है— ईरान की मौजूदा इस्लामी सरकार को खत्म करना और लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव डालना।
रजा पहलवी के मुताबिक हर हफ्ते इस प्लेटफॉर्म पर नए अधिकारी जुड़ रहे हैं। इन सभी के प्रोफाइल की विश्वसनीयता का मूल्यांकन किया जा रहा है। उनकी अगली योजना आम नागरिकों को जोड़ने की है, जिसके लिए एक नई वेबसाइट शुरू की जा रही है। यह आंदोलन अब सिर्फ सत्ता के भीतर नहीं, बल्कि जनता के स्तर पर भी उतरने वाला है।
इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा पड़ाव शनिवार को म्यूनिख में देखा जाएगा, जहां रजा पहलवी द्वारा आयोजित नेशनल कोऑपरेशन कन्वेंशन में दुनिया भर के ईरानी विपक्षी नेता, कलाकार, सामाजिक कार्यकर्ता और खिलाड़ी शामिल होंगे। 1979 की क्रांति के बाद यह पहला मौका है जब इतनी बड़ी संख्या में ईरानी विरोधी ताकतें एक मंच पर एकत्र हो रही हैं। इस सम्मेलन का मकसद है— ईरान की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा, नागरिकों की स्वतंत्रता और समानता की गारंटी, और धर्म तथा सत्ता का स्पष्ट अलगाव।
हालांकि, रजा पहलवी की इस मुहिम पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। कई आलोचक मानते हैं कि एक शाही परिवार से आने वाला व्यक्ति लोकतंत्र के सपने को धूमिल कर सकता है। विपक्षी गुटों के बीच एकता की कमी और पहलवी की नेतृत्व क्षमता पर भी शक जताया जा रहा है। मगर म्यूनिख सम्मेलन को इसी छवि को सुधारने की रणनीतिक कोशिश माना जा रहा है।
अब सवाल यह नहीं है कि क्या सत्ता बदलेगी, बल्कि यह है कि यह कब और कैसे होगा। क्या ईरान के 50 हजार अधिकारी वाकई सत्ता की चाबी किसी और को सौंपने की तैयारी में हैं? या यह सब एक सुनियोजित भ्रम है? इन सवालों के जवाब तो वक्त देगा, मगर इतना तय है कि ईरान के भीतर बदलाव की आहट तेज़ होती जा रही है।
Share this content:
