May 5, 2026

फ्रांस ने फिलिस्तीन को अलग देश की मान्यता देने का किया ऐलान, मैक्रों की अरब नीति में बड़ा बदलाव

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय कदम उठाते हुए सितंबर 2025 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा देने का प्रस्ताव रखने की घोषणा की है। यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब गाजा में संघर्ष विराम की कोशिशें चल रही हैं और इजराइल पर मिडिल ईस्ट में हमले करने के गंभीर आरोप लगे हैं। मैक्रों के इस रुख को फ्रांस की पारंपरिक अरब नीति में वापसी और इजराइल को कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

 

इतिहास पर नजर डालें तो फ्रांस की अरब नीति की शुरुआत 1958 में चार्ल्स डी गॉल के कार्यकाल में हुई थी, जब उन्होंने इजराइल से परमाणु समर्थन वापस ले लिया था। 1970 और 1990 के दशक तक फ्रांस फिलिस्तीन के समर्थन में खुलकर खड़ा रहा, लेकिन बाद में यह नीति कमजोर पड़ गई। अब मैक्रों इस नीति को दोबारा अपनाकर खुद को एक सक्रिय अंतरराष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।

 

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मैक्रों की यह पहल उनके दीर्घकालिक राजनीतिक एजेंडे से भी जुड़ी है। 2027 में उनका मौजूदा कार्यकाल खत्म हो रहा है, लेकिन उन्होंने 2033 के चुनावों की तैयारी अभी से शुरू कर दी है। फ्रांस की 13% मुस्लिम आबादी को देखते हुए मैक्रों का यह कदम मुस्लिम वोटबैंक को साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

 

इसके अलावा, यह फैसला इजराइल के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है। फ्रांस की मान्यता मिलने से ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों पर भी दबाव बढ़ेगा। अगर ब्रिटेन भी ऐसा ही फैसला करता है तो इजराइल को पूरे यूरोप में अलग-थलग किया जा सकता है। फ्रांस ने फिलिस्तीन से हमास को राजनीतिक संगठन के रूप में स्वीकार करने की बात कही है और हथियार छोड़ने की शर्त भी रखी है।

 

दूसरी ओर, इजराइल इस फैसले का विरोध कर रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि फिलिस्तीन को मान्यता देने से आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा और ईरान को मिडिल ईस्ट में सक्रिय होने का अवसर मिलेगा। इजराइल की चिंता है कि फिलिस्तीन को अगर सेना रखने की छूट मिलती है, तो इसका फायदा उसके विरोधी उठा सकते हैं।

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