एनबीआरआई का नवाचार: प्रयागराज महाकुंभ के ‘जल मंथन’ से बना सुगंधित फ्रोटस-कुंभ इत्र
लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) ने एक अनूठा इत्र ‘फ्रोटस-कुंभ’ तैयार किया है, जिसे प्रयागराज महाकुंभ के दौरान संगम से एकत्र किए गए पवित्र जल से बनाया गया है। इस इत्र में बेलपत्र का शुद्ध तेल, तुलसी और अन्य आयुर्वेदिक औषधीय तत्वों का उपयोग किया गया है, जिससे इसे एक दिव्य और ताजगी से भरपूर सुगंध प्राप्त होती है। संस्थान ने इस उत्पाद का पेटेंट भी करा लिया है और कई कंपनियां इसकी टेक्नोलॉजी को प्राप्त करने में रुचि दिखा रही हैं।
महाकुंभ के दौरान संगम तट पर एकत्र किए गए 25 लीटर पवित्र जल को विशेष प्रक्रिया से सुरक्षित रखा गया है। एनबीआरआई के अनुसार जिस भी कंपनी को इस इत्र की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की जाएगी, उसे यह जल भी प्रदान किया जाएगा। इत्र को आस्था, विज्ञान और पवित्रता की त्रिवेणी का प्रतीक माना जा रहा है और इसे एक आध्यात्मिक नवाचार के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
संस्थान का दावा है कि फ्रोटस-कुंभ बाजार में मौजूद अन्य कुंभ जल आधारित उत्पादों से पूरी तरह अलग है। बेलपत्र के तेल में पाई जाने वाली तीक्ष्ण, आयुर्वेदिक सुगंध इसे विशिष्ट बनाती है। यह सुगंध भले ही फूलों या फलों जैसी तीव्र न हो, लेकिन आयुर्वेदिक अरोमा थेरेपी में इसका खास महत्व है।
महाकुंभ के दौरान लाखों श्रद्धालु संगम स्नान कर अमृत योग का लाभ लेने पहुंचे थे। लोग उस पवित्र जल की कुछ बूंदों को सहेज कर ले जाना चाहते थे। अब यही भावना इत्र के रूप में साकार हो रही है, जो न केवल शरीर को सुगंधित करता है बल्कि मानसिक शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव भी कराता है।
एनबीआरआई इस इत्र को आध्यात्मिक सुगंध और वैज्ञानिक नवाचार के मेल के रूप में देखता है। इस अनूठे प्रयास से भारत की सांस्कृतिक परंपरा, विज्ञान और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को एक साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे यह उत्पाद न केवल घरेलू बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सराहना प्राप्त कर सकता है।
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