‘हरि हर वीरा मल्लू – पार्ट 1’ सिनेमाघरों में रिलीज, पवन कल्याण की एक्शन और विचारधारा से भरी फिल्म पर सबकी नजर
पवन कल्याण और बॉबी देओल स्टारर फिल्म ‘हरि हर वीरा मल्लू – पार्ट 1: स्वॉर्ड वर्सेज स्पिरिट’ आखिरकार 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस ऐतिहासिक-काल्पनिक फिल्म को लंबे समय से लेकर चर्चाएं हो रही थीं, और दर्शक इसके भव्य ट्रेलर के बाद से काफी उत्साहित थे। निर्देशक कृष जगरलामुडी द्वारा निर्देशित यह फिल्म 17वीं सदी के भारत में मुगलों के अत्याचार और एक सनातनी योद्धा के विद्रोह की कहानी को बड़े स्केल पर प्रस्तुत करती है।
कहानी मुगल सम्राट औरंगजेब के दौर की है, जब धर्म के नाम पर जजिया कर लगाया जाता था। ऐसे समय में एक वीर डाकू वीरा मल्लू (पवन कल्याण) सामने आता है, जो मुगलों से कोहिनूर हीरा चुराकर भारत के आत्मसम्मान को वापस लाने की कोशिश करता है। फिल्म धर्म, राजनीति और सांस्कृतिक संघर्ष को आधार बनाकर एक विचारधारात्मक लड़ाई की कथा कहती है – तलवार बनाम आत्मा।
पवन कल्याण ने फिल्म में अपने किरदार को पूरी ताकत और संकल्प के साथ निभाया है। उनके एक्शन दृश्य खासकर क्लाइमेक्स का 18 मिनट लंबा सीन दर्शकों को बांधे रखता है। वहीं बॉबी देओल औरंगजेब के किरदार में प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन स्क्रिप्ट उनके किरदार को ज़्यादा गहराई नहीं दे पाती। सह कलाकारों में निधि अग्रवाल, नरगिस फाखरी और सत्यराज जैसे नाम हैं, लेकिन महिला पात्रों को कहानी में ज्यादा स्पेस नहीं दिया गया है।
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी, प्रोडक्शन डिज़ाइन और बैकग्राउंड स्कोर इसकी भव्यता को मजबूत बनाते हैं। संगीतकार एमएम कीरवानी का म्यूजिक और विजुअल इफेक्ट्स कई दृश्यों को यादगार बना देते हैं, हालांकि कुछ सीन्स में CGI का स्तर थोड़ा कमजोर नज़र आता है। एक्शन कोरियोग्राफी खासतौर पर तलवारबाज़ी के दृश्य फिल्म की जान हैं।
‘हरि हर वीरा मल्लू’ एक वैचारिक फिल्म है, जो मुगलों के अत्याचार, सनातन संस्कृति और आत्मगौरव को केंद्र में रखती है। हालांकि इसकी पटकथा कई बार कमजोर होती है और फिल्म कुछ हिस्सों में खिंची हुई लगती है, लेकिन इसके विचार और प्रस्तुतिकरण इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाते हैं।
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