April 30, 2026

ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन का बांध निर्माण शुरू, भारत-बांग्लादेश की बढ़ी चिंता

चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया के सबसे बड़े हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के निर्माण की शुरुआत कर दी है। यह निर्माण अरुणाचल प्रदेश की सीमा के बेहद करीब न्यिंगची शहर में यारलुंग जंगबो नदी (ब्रह्मपुत्र का तिब्बती नाम) पर किया जा रहा है। चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग ने खुद भूमि पूजन समारोह में इस मेगा प्रोजेक्ट की शुरुआत की घोषणा की, जिसकी लागत करीब 167.8 अरब डॉलर बताई जा रही है।

 

इस विशाल परियोजना में पांच कैस्केड हाइड्रोपावर स्टेशन शामिल होंगे और इससे हर साल करीब 300 अरब किलोवाट घंटे बिजली उत्पादन की उम्मीद है। यह बिजली उत्पादन 30 करोड़ लोगों की वार्षिक जरूरत को पूरा करने के लिए काफी मानी जा रही है। यह बिजली न केवल चीन की स्थानीय मांग को पूरा करेगी, बल्कि बाहरी खपत के लिए भी पर्याप्त होगी।

 

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर भारत और बांग्लादेश में गंभीर चिंता जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस डैम के जरिए चीन जल प्रवाह को नियंत्रित करने में सक्षम हो सकता है, जो युद्ध जैसी स्थिति में निचले क्षेत्रों में बाढ़ लाने का माध्यम भी बन सकता है। यह रणनीतिक खतरा भारत के लिए विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि ब्रह्मपुत्र उत्तर-पूर्व भारत और बांग्लादेश की जीवन रेखा मानी जाती है।

 

भारत पहले ही अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र पर एक जवाबी डैम प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। दोनों देशों के बीच सीमा पार नदियों के जल प्रबंधन पर बातचीत के लिए एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म (ELM) 2006 में बनाया गया था, जिसके तहत चीन मॉनसून सीजन में भारत को जल संबंधी जानकारियां देता है। लेकिन इस नए निर्माण से पारस्परिक विश्वास पर फिर सवाल उठने लगे हैं।

 

चीन का यह डैम उस क्षेत्र में बनाया जा रहा है जो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमा पर स्थित है और जहां भूकंप का खतरा अधिक रहता है। हालांकि चीन का दावा है कि उन्होंने भूकंप जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित निर्माण के लिए वैज्ञानिक आधार तैयार किया है। बावजूद इसके, पर्यावरणीय संतुलन और राजनीतिक स्थिरता के लिहाज से यह प्रोजेक्ट भारत और बांग्लादेश के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।

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